जीवन Poetry (page 22)

नुमाइश-ए-अलीगढ़

शकील बदायुनी

मुझे भूल जा

शकील बदायुनी

ज़िंदगी उन की चाह में गुज़री

शकील बदायुनी

ज़िंदगी उन की चाह में गुज़री

शकील बदायुनी

ज़िंदगी का दर्द ले कर इंक़लाब आया तो क्या

शकील बदायुनी

ज़ौक़-ए-गुनाह ओ अज़्म-ए-पशेमाँ लिए हुए

शकील बदायुनी

उठी फिर दिल में इक मौज-ए-शबाब आहिस्ता आहिस्ता

शकील बदायुनी

उन को शरह-ए-ग़म सुनाई जाएगी

शकील बदायुनी

उन के बग़ैर हम जो गुलिस्ताँ में आ गए

शकील बदायुनी

तिरी महफ़िल से उठ कर इश्क़ के मारों पे क्या गुज़री

शकील बदायुनी

तिरी अंजुमन में ज़ालिम अजब एहतिमाम देखा

शकील बदायुनी

तिरे बग़ैर अजब बज़्म-ए-दिल का आलम है

शकील बदायुनी

तकमील-ए-शबाब चाहता हूँ

शकील बदायुनी

सुब्ह का अफ़्साना कह कर शाम से

शकील बदायुनी

राह-ए-ख़ुदा में आलम-ए-रिन्दाना मिल गया

शकील बदायुनी

पहलू में दर्द-ए-इश्क़ की दुनिया लिए हुए

शकील बदायुनी

नुमायाँ दोनों जानिब शान-ए-फ़ितरत होती जाती है

शकील बदायुनी

नज़र-नवाज़ नज़ारों में जी नहीं लगता

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी है ज़ालिम तिरे ग़म से आश्कारा

शकील बदायुनी

मेरी बर्बादी को चश्म-ए-मो'तबर से देखिए

शकील बदायुनी

मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे

शकील बदायुनी

मौसम-ए-गुल साथ ले कर बर्क़ ओ दाम आ ही गया

शकील बदायुनी

कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ' नहीं है

शकील बदायुनी

कहीं हुस्न का तक़ाज़ा कहीं वक़्त के इशारे

शकील बदायुनी

जुनूँ से गुज़रने को जी चाहता है

शकील बदायुनी

इस दर्जा बद-गुमाँ हैं ख़ुलूस-ए-बशर से हम

शकील बदायुनी

हम हैं और उन की ख़ुशी है आज-कल

शकील बदायुनी

हाए इस मजबूरी-ए-ज़ौक़-ए-नज़र को क्या करूँ

शकील बदायुनी

ग़म-ए-इश्क़ रह गया है ग़म-ए-जुस्तुजू में ढल कर

शकील बदायुनी

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