बात Poetry (page 11)

तरवार खींच हम को दिखाते हो जब न तब

वलीउल्लाह मुहिब

साथ ग़ैरों के है सदा गट-पट

वलीउल्लाह मुहिब

मेरी ख़बर न लेना ऐ यार है तअ'ज्जुब

वलीउल्लाह मुहिब

मिरे दिल में हिज्र के बाब हैं तुझे अब तलक वही नाज़ है

वलीउल्लाह मुहिब

आना है तो आ जाओ यक आन मिरा साहब

वलीउल्लाह मुहिब

मेरे अश्कों की गई थी रेल वीराने पे क्या गुज़रा

वली उज़लत

वो नाज़नीं अदा में एजाज़ है सरापा

वली मोहम्मद वली

तुझ लब की सिफ़त लाल-ए-बदख़्शाँ सूँ कहूँगा

वली मोहम्मद वली

सजन टुक नाज़ सूँ मुझ पास आ आहिस्ता आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

हुए हैं राम पीतम के नयन आहिस्ता-आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

हुआ ज़ाहिर ख़त-ए-रू-ए-निगार आहिस्ता-आहिस्ता

वली मोहम्मद वली

दिल हुआ है मिरा ख़राब-ए-सुख़न

वली मोहम्मद वली

देखना हर सुब्ह तुझ रुख़्सार का

वली मोहम्मद वली

भड़के है दिल की आतिश तुझ नेह की हवा सूँ

वली मोहम्मद वली

यूँ भी जीने के बहाने निकले

वली आलम शाहीन

आरज़ू ले के कोई घर से निकलते क्यूँ हो

वाली आसी

यूँ तो तन्हाई में घबराए बहुत

वकील अख़्तर

सुन रक्खो उसे दिल का लगाना नहीं अच्छा

वाजिद अली शाह अख़्तर

क्या बताएँ उस के बिन कैसे ज़िंदगी कर ली

वजीह सानी

होंट मसरूफ़-ए-दुआ आँख सवाली क्यूँ है

वजीह सानी

साए ने साए को सदा दी

वजद चुगताई

लगाएँ आग ही दिल में कि कुछ उजाला हो

वजद चुगताई

किसी सूरत से उस महफ़िल में जा कर

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

जान उस की अदाओं पर निकलती ही रहेगी

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

हक़ बात सर-ए-बज़्म भी कहने में तअम्मुल

वाहिद प्रेमी

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए

वहीद अख़्तर

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए

वहीद अख़्तर

दीवानों को मंज़िल का पता याद नहीं है

वहीद अख़्तर

हर रौशनी की बूँद पे लब रख चुकी है रात

वहाब दानिश

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.