बात Poetry (page 10)

समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं

वसी शाह

बाज़ औक़ात फ़राग़त में इक ऐसा लम्हा आता है

वसीम ताशिफ़

जाने क्यूँ भाई का भाई खुल के दुश्मन हो गया

वसीम मीनाई

ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है

वसीम बरेलवी

उन से कह दो मुझे ख़ामोश ही रहने दे 'वसीम'

वसीम बरेलवी

खिलौना

वसीम बरेलवी

ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है

वसीम बरेलवी

ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है

वसीम बरेलवी

उदासियों में भी रस्ते निकाल लेता है

वसीम बरेलवी

तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते

वसीम बरेलवी

मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता

वसीम बरेलवी

क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया

वसीम बरेलवी

कुछ इतना ख़ौफ़ का मारा हुआ भी प्यार न हो

वसीम बरेलवी

कहाँ क़तरे की ग़म-ख़्वारी करे है

वसीम बरेलवी

दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता

वसीम बरेलवी

बदले हुए हालात से मायूस न होना

वाक़िफ़ राय बरेलवी

किस क़दर वज़्न है ख़ताओं में

वक़ार वासिक़ी

जिस बात को सुन कर तुझे तकलीफ़ हुई है

वक़ार वासिक़ी

मिरे वजूद को पामाल करना चाहता है

वक़ार मानवी

ये मानता हूँ कि सौ बार झूट कहता है

वक़ार ख़ान

बरसों बा'द मिला तो उस ने हम से पूछा कैसे हो

वक़ार फ़ातमी

तुम ख़फ़ा क्या हुए हयात गई

वक़ार बिजनोरी

मस्त नज़रों का इल्तिफ़ात न पूछ

वक़ार बिजनोरी

इश्क़ में ख़ुद-सरी नहीं होती

वक़ार बिजनोरी

चश्म-ए-यक़ीं से देखिए जल्वा-गह-ए-सिफ़ात में

वक़ार बिजनोरी

वो तो कहिए आज भी ज़ंजीर में झंकार है

वामिक़ जौनपुरी

तुझ से मिल कर दिल में रह जाती है अरमानों की बात

वामिक़ जौनपुरी

जीने का लुत्फ़ कुछ तो उठाओ नशे में आओ

वामिक़ जौनपुरी

हो रही है दर-ब-दर ऐसी जबीं-साई कि बस

वामिक़ जौनपुरी

उस बुत ने गुलाबी जो उठा मुँह से लगाई

वलीउल्लाह मुहिब

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