बात Poetry (page 14)

ये रोज़-ओ-शब की मसाफ़त ये आना जाना मिरा

तारिक़ क़मर

पाँव जब हो गए पत्थर तो सदा दी उस ने

तारिक़ क़मर

नज़र नज़र से मिला कर कलाम कर आया

तारिक़ क़मर

देखें कितने चाहने वाले निकलेंगे

तारिक़ क़मर

वो ख़ुद गया है उस का असर तो नहीं गया

तारिक़ नईम

फिर इस से क़ब्ल कि बार-ए-दिगर बनाया जाए

तारिक़ नईम

मुझे ज़िंदगी से ख़िराज ही नहीं मिल रहा

तारिक़ नईम

दर-ओ-बस्त-ए-अनासिर पारा पारा होने वाला है

तारिक़ नईम

घर में बैठूँ तो शनासाई बुरा मानती है

तारिक़ मतीन

लब-ए-ख़मोश मिरा बात से ज़ियादा है

तारिक़ हाश्मी

नज़र का नश्शा बदन का ख़ुमार टूट गया

तारिक़ बट

रास्ते में आ रहे हैं जो नदी नाले न देख

तनवीर गौहर

रोज़ तब्दील हुआ है मिरे दिल का मौसम

तनवीर सामानी

ख़ुद से भी इक बात छुपाया करता हूँ

तनवीर सामानी

अहबाब हो गए हैं बहुत मुझ से बद-गुमान

तनवीर सामानी

पहले मौसम के बा'द

तनवीर अंजुम

इंतिज़ार

तनवीर अंजुम

ये बात दश्त-ए-वफ़ा की नहीं चमन की है

तनवीर अहमद अल्वी

कमंद-ए-हल्क़ा-ए-गुफ़तार तोड़ दी मैं ने

तनवीर अहमद अल्वी

फ़िशार-ए-हुस्न से आग़ोश-ए-तंग महके है

तनवीर अहमद अल्वी

शराब शहर में नीलाम हो गई होगी

तालिब हुसैन तालिब

बेज़ार ज़िंदगी से दिल-ए-मुज़्महिल नहीं

तालिब चकवाली

फिर क़िस्सा-ए-शब लिख देने के ये दिल हालात बनाए है

तालीफ़ हैदर

एक आवाज़

तख़्त सिंह

भूली-बिसरी रात

तख़्त सिंह

तिलिस्म-ए-इश्क़ था सब उस का साथ होने तक

ताजदार आदिल

जो मिल गया है यहाँ जल्वा-ए-ख़याली है

ताजदार आदिल

किस ने आ कर हम को दी आवाज़ पिछली रात में

ताज सईद

ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है

ताज भोपाली

दिल तेरी नज़र की शह पा कर मिलने के बहाने ढूँढे है

ताज भोपाली

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