बात Poetry (page 16)

लुत्फ़ ये है जिसे आशोब-ए-जहाँ कहता हूँ

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

वो तो सुनता नहीं किसी की बात

ताबाँ अब्दुल हई

तू भली बात से ही मेरी ख़फ़ा होता है

ताबाँ अब्दुल हई

तिरी बात लावे जो पैग़ाम-बर

ताबाँ अब्दुल हई

यार से अब के गर मिलूँ 'ताबाँ'

ताबाँ अब्दुल हई

यार रूठा है मिरा उस को मनाऊँ किस तरह

ताबाँ अब्दुल हई

तुम्हारे हिज्र में रहता है हम को ग़म मियाँ-साहिब

ताबाँ अब्दुल हई

तू भली बात से ही मेरी ख़फ़ा होता है

ताबाँ अब्दुल हई

सुन फ़स्ल-ए-गुल ख़ुशी हो गुलशन में आइयाँ हैं

ताबाँ अब्दुल हई

क्या करें क्यूँ-कर रहें दुनिया में यारो हम ख़ुशी

ताबाँ अब्दुल हई

है आरज़ू ये जी में उस की गली में जावें

ताबाँ अब्दुल हई

दो दमों से है फ़क़त गोर-ए-ग़रीबाँ आबाद

तअशशुक़ लखनवी

ख़ुलासा ये मिरे हालात का है

सय्यद ज़मीर जाफ़री

हम न्यूट्रल हैं ख़ारजा हिकमत के बाब में

सय्यद ज़मीर जाफ़री

गा रहा हूँ ख़ामुशी में दर्द के नग़्मात मैं

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपने ज़र्फ़ अपनी तलब अपनी नज़र की बात है

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अफ़्साना-ए-मजनूँ से नहीं कम मिरा क़िस्सा

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

मैं ने कहा कि दा'वा-ए-उलफ़त मगर ग़लत

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

कभी ख़ूँ होती हुए और कभी जलते देखा

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

इस तवक़्क़ो' पे कि देखूँ कभी आते जाते

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

हम ने सौ सौ तरह बनाई बात

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

हम को हवस-ए-जल्वा-गाह-ए-तूर नहीं है

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

चाहूँ तो अभी हिज्र के हालात बता दूँ

सय्यद तम्जीद हैदर तम्जीद

किस को ख़बर ये हस्ती क्या है कितनी हक़ीक़त कितना ख़्वाब

सय्यद शकील दस्नवी

इतनी मुद्दत बा'द मिले हो कुछ तो दिल का हाल कहो

सय्यद शकील दस्नवी

छोटी सी ये बात सही पर खींचे है ये तूल मियाँ

सय्यद शकील दस्नवी

बैठे रहेंगे थाम के कब तक यूँ ख़ाली पैमाने लोग

सय्यद शकील दस्नवी

कही बात उस ने भी ख़दशात की

सय्यद सग़ीर सफ़ी

कभी बहार न आई बहार की सूरत

सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी

रिवाज-ओ-रस्म का उस को हुनर भी आता है

सय्यद मुनीर

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