बात Poetry (page 22)

शुक्र को शिकवा-ए-जफ़ा समझे

शोला अलीगढ़ी

हुजूम-ए-यास में लेने वो कब ख़बर आया

शोला अलीगढ़ी

दिल की इक हर्फ़-ओ-हिकायात है ये भी न सही

शोला अलीगढ़ी

रस्म-ए-गिर्या भी उठा दी हम ने

शोहरत बुख़ारी

जाने क्या बात है मानूस बहुत लगता है

शोहरत बुख़ारी

हम पी गए सब हिले न लब तक

शोहरत बुख़ारी

हम पी गए सब हिले न अब तक

शोहरत बुख़ारी

नाज़ भला किस बात का तुझ को पास-ए-हुनर जब कुछ भी नहीं

शमशाद शाद

दाग़ जो अब तक अयाँ हैं वो बता कैसे मिटें

शिवकुमार बिलग्रामी

इश्क़ में ऐसी करामात कहाँ थी पहले

शिव दयाल सहाब

साक़ी-ए-दौराँ कहाँ वो तेरे मय-ख़ाने गए

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

मुस्लिम-लीग

शिबली नोमानी

तीस दिन के लिए तर्क-ए-मय-ओ-साक़ी कर लूँ

शिबली नोमानी

होती है लबों पर ख़ामोशी आँखों में मोहब्बत होती है

शेवन बिजनौरी

ग़म से भीगे हुए नग़्मात कहाँ से लाऊँ

शेवन बिजनौरी

उस को अपनी ज़ात ख़ुदा की ज़ात लगी है

शेर अफ़ज़ल जाफ़री

टहनियाँ फूलों को तरसेंगी यहाँ तेरे बा'द

शेर अफ़ज़ल जाफ़री

महफ़िल में शोर-ए-क़ुलक़ुल-ए-मीना-ए-मुल हुआ

ज़ौक़

कोई कमर को तिरी कुछ जो हो कमर तो कहे

ज़ौक़

नींद उजड़ी तो निगाहों में मनाज़िर क्या हैं

शहपर रसूल

नसब ये है कि वो दुश्मन को कम-नसब न कहे

शहपर रसूल

मेरी नज़र का मुद्दआ उस के सिवा कुछ भी नहीं

शहपर रसूल

हम ज़िंदगी-शनास थे सब से जुदा रहे

शहपर रसूल

दस्त-ए-अदू से शब जो वो साग़र लिया किए

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

असर-ए-आह-ए-दिल-ए-ज़ार की अफ़्वाहें हैं

मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता

क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म

शाज़ तमकनत

बे-नंग-ओ-नाम

शाज़ तमकनत

ज़रा सी बात थी बात आ गई जुदाई तक

शाज़ तमकनत

वो गदा-गरान-ए-जल्वा सर-ए-रहगुज़ार चुप थे

शाज़ तमकनत

जिस तरफ़ जाऊँ उधर आलम-ए-तन्हाई है

शाज़ तमकनत

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