बात Poetry (page 34)

गर कीजिए इंसाफ़ तो की ज़ोर वफ़ा मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

गुज़र चली है शब-ए-दिल-फ़िगार आख़िरी बार

सऊद उस्मानी

दीवार पे रक्खा हुआ मिट्टी का दिया मैं

सऊद उस्मानी

ज़मीं की वुसअ'तों से आसमाँ तक

सत्यपाल जाँबाज़

उन को है ए'तिदाल मुझे इंतिहा पसंद

सत्यपाल जाँबाज़

कैसी है ये बहार मुक़द्दर की बात है

सत्यपाल जाँबाज़

बहार-ए-गुल से अब दौर-ए-ख़िज़ाँ तक

सत्यपाल जाँबाज़

शुऊर की तह के फाटकों पर

सत्यपाल आनंद

मैं दो जन्मा

सत्यपाल आनंद

फ़ता-कल्लमू तअ'रफू

सत्यपाल आनंद

अगला सफ़र तवील नहीं

सत्यपाल आनंद

कहाँ कहाँ से निगह उस को ढूँड लाए है

सत्य नन्द जावा

दश्त-ए-तन्हाई में हम ख़ाक उड़ा देते हैं

सत्य नन्द जावा

फिर आस दे के आज को कल कर दिया गया

सरवत ज़ेहरा

बा'द मुद्दत के मिरे आँख से आँसू निकले

सरवर नेपाली

ऐ ख़्वाब-ए-दिल-नवाज़ न आ कर सता मुझे

सरवर नेपाली

जिस क़दर शिकवे थे सब हर्फ़-ए-दुआ होने लगे

सरवर आलम राज़

ढोल का पोल

सरमद सहबाई

रौशनी रंगों में सिमटा हुआ धोका ही न हो

सरमद सहबाई

किस शख़्स की तलाश में सर फोड़ती रही

सरमद सहबाई

ये जो तालाब है दरिया था कभी

सरफ़राज़ ज़ाहिद

मकीन को मकान से निकालिए

सरफ़राज़ ज़ाहिद

ऐसी वैसी पे क़नाअ'त नहीं कर सकते हम

सरफ़राज़ ज़ाहिद

ऐसी वैसी पे क़नाअत नहीं कर सकते हम

सरफ़राज़ ज़ाहिद

ख़ुदा करे कि वही बात उस के दिल में हो

सरफ़राज़ नवाज़

तिरे ख़ुलूस के क़िस्से सुना रहा हूँ मैं

सरफ़राज़ नवाज़

अब मुझ में कोई बात नई ढूँढने वालो

सरफ़राज़ ख़ालिद

आँखों में अगर आप की सूरत नहीं होती

सरफ़राज़ अबद

ख़बर है मेरी रुस्वाई की

सरफ़राज़ शाहिद

क़ाबिज़ रहा है दिल पे जो सुल्तान की तरह

सरफ़राज़ शाहिद

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