दामन Poetry (page 35)

इश्क़ पर दाना नहीं मोहताज-ए-तहरीक-ए-जमाल

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

रंगीं बना के दामन-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर को मैं

अनवर सहारनपुरी

वादा-ए-शाम-ए-फ़र्दा पे ऐ दिल मुझे गर यक़ीं ही न आए तो मैं क्या करूँ

अनवर मिर्ज़ापुरी

रुख़ से पर्दा उठा दे ज़रा साक़िया बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जाएगा

अनवर मिर्ज़ापुरी

मैं तो समझा था जिस वक़्त मुझ को वो मिलेंगे तो जन्नत मिलेगी

अनवर मिर्ज़ापुरी

इस वास्ते दामन चाक किया शायद ये जुनूँ काम आ जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

अब अपना हाल हम उन्हें तहरीर कर चुके

अनवर देहलवी

डूबते तारों से पूछो न क़मर से पूछो

अनवर मोअज़्ज़म

आओ देखें अहल-ए-वफ़ा की होती है तौक़ीर कहाँ

अनवर मोअज़्ज़म

ये मोहब्बत का जो अम्बार पड़ा है मुझ में

अंजुम सलीमी

किस की जबीं पे हैं ये सितारे अरक़ अरक़

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात, कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

धूप आती नहीं रुख़ अपना बदल कर देखें

अंजुम इरफ़ानी

जो शब भर आँसुओं से तर रहेगा

अंजुम आज़मी

अपनी जेब थी ख़ाली ख़ाली करते क्या

अंजुम अज़ीमाबादी

बाग़ में रह के बहारों को निभाना होगा

अंजुम अंसारी

तिरे गेसुओं के साए में जो एक पल रहा हूँ

अनीस अहमद अनीस

जो आईने से तेरी जल्वा-सामानी नहीं जाती

अनीस अहमद अनीस

फ़िराक़-ए-यार में कुछ कहिए समझाया नहीं जाता

अनीस अहमद अनीस

चलो ये सच ही सही होगा ना-गहाँ गुज़रे

अनीस अहमद अनीस

क्या कहिए रू-ए-हुस्न पे आलम नक़ाब का

अंदलीब शादानी

देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो

अंदलीब शादानी

तराना-ए-ग़म-ए-पिन्हाँ है हर ख़ुशी अपनी

अमजद नजमी

न कुछ आलिम समझते हैं न कुछ जाहिल समझते हैं

अमजद नजमी

शिकस्त-ए-अना

अमजद इस्लाम अमजद

सेल्फ़ मेड लोगों का अलमिया

अमजद इस्लाम अमजद

ख़ुद-सुपुर्दगी

अमजद इस्लाम अमजद

एक आज़ार हुई जाती है शोहरत हम को

अमजद इस्लाम अमजद

गर यही है आदत-ए-तकरार हँसते बोलते

अमीरुल्लाह तस्लीम

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