दम Poetry (page 25)

यक़ीनन है कोई माह-ए-मुनव्वर पीछे चिलमन के

रंजूर अज़ीमाबादी

देता है मुझ को चर्ख़-ए-कुहन बार बार दाग़

रंजूर अज़ीमाबादी

हमदमो क्या मुझ को तुम उन से मिला सकते नहीं

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

कुछ इस अदा से सफ़ीरान-ए-नौ-बहार चले

रम्ज़ अज़ीमाबादी

साए से हौसले के बिदकते हैं रास्ते

राम प्रकाश राही

रक़्स-ए-शबाब-ओ-रंग-ए-बहाराँ नज़र में है

राम कृष्ण मुज़्तर

अजब नहीं है मुआलिज शिफ़ा से मर जाएँ

राकिब मुख़्तार

हर जाद-ए-शहर

राजेन्द्र मनचंदा बानी

ये ज़रा सा कुछ और एक-दम बे-हिसाब सा कुछ

राजेन्द्र मनचंदा बानी

सद-सौग़ात सकूँ फ़िरदौस सितंबर आ

राजेन्द्र मनचंदा बानी

अली-बिन-मुत्तक़ी रोया

राजेन्द्र मनचंदा बानी

हाथ उठाता है दुआओं को फ़लक भी उस दम

राजेश रेड्डी

कितनी आसानी से दुनिया की गिरह खोलता है

राजेश रेड्डी

क्या आज उन से अपनी मुलाक़ात हो गई

राजेन्द्र नाथ रहबर

तर्क जिस दिन से किया हम ने शकेबाई का

रजब अली बेग सुरूर

अभी से मत कहो दिल का ख़लल जावे तो बेहतर है

रजब अली बेग सुरूर

बोर्ड ऑफ़ इंटरव्यू

राजा मेहदी अली ख़ाँ

हँसी हँसी में हर इक ग़म छुपाने आते हैं

रईस सिद्दीक़ी

ऐ दिल शरीक-ए-ताइफ़ा-ए-वज्द-ओ-हाल हो

रईस अमरोहवी

परेशाँ करने वालों को परेशाँ कौन देखेगा

रहमत इलाही बर्क़ आज़मी

एक तारीक ख़ला उस में चमकता हवा मैं

इरफ़ान सत्तार

चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर-ए-अजल पड़ता है

इरफ़ान सत्तार

मिरे पाँव में पायल की वही झंकार ज़िंदा है

इरम ज़ेहरा

मैं कई बरसों से तेरी जुस्तुजू करती रही

इरम ज़ेहरा

हुस्न-ए-फ़ितरत की आबरू मुझ से

इक़बाल सुहैल

हर मोड़ नई इक उलझन है क़दमों का सँभलना मुश्किल है

इक़बाल सफ़ी पूरी

ध्यान आया मुझे रात की तन्हा-सफ़री का

इक़बाल कौसर

मैं दर पे तिरे दर-ब-दरी से निकल आया

इक़बाल कौसर

सुब्ह-दम मुझ से लिपट कर वो नशे में बोले

इंशा अल्लाह ख़ान

सद-बर्ग गह दिखाई है गह अर्ग़वाँ बसंत

इंशा अल्लाह ख़ान

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