दम Poetry (page 45)

नक़्शे उसी के दिल में हैं अब तक खिंचे हुए

अज़ीज़ हामिद मदनी

मैं किसी जन्म की यादों पे पड़ा पर्दा हूँ

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मुझ को वहशत हुई मिरे घर से

अज़हर इक़बाल

वो ताज़ा-दम हैं नए शो'बदे दिखाते हुए

अज़हर इनायती

वो ताज़ा-दम हैं नए शो'बदे दिखाते हुए

अज़हर इनायती

मंज़र-ए-शाम-ए-ग़रीबाँ है दम-ए-रुख़्सत-ए-ख़्वाब

अज़हर फ़राग़

कोई भी शक्ल मिरे दिल में उतर सकती है

अज़हर फ़राग़

वो शोख़ दिल-ओ-जाँ की तमन्ना तो न निकला

अज़ीम कुरेशी

बीच दिलों में उतरा तो है

अज़ीम कुरेशी

ग़म का ये सलीक़ा भी रह गया है अब हम तक

अज़ीम मुर्तज़ा

साँस लेता हूँ तो दम घुटता है

अय्यूब रूमानी

दिल में कुछ दर्द सिवा है यारो

अय्यूब रूमानी

उस ने हमारे हाथ में इक हाथ क्या दिया

आएशा मसूद मलिक

आख़िर बिगड़ गए मिरे सब काम होने तक

औरंगज़ेब

कौन गुज़रा था मेहराब-ए-जाँ से अभी ख़ामुशी शोर भरता हुआ

अतीक़ुल्लाह

वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी

आतिफ़ ख़ान

रौनक़-ए-बेश-ओ-कम किस के होने से है

अतहर नफ़ीस

दम-ब-दम बढ़ रही है ये कैसी सदा शहर वालो सुनो

अतहर नफ़ीस

करता मैं अब किसी से कोई इल्तिमास क्या

अतहर नादिर

अपनी बेटी के नाम

अतीया दाऊद

मिरी मुश्किल अगर आसाँ बना देते तो अच्छा था

अतीक़ुर्रहमान सफ़ी

दम-ब-दम एक साथ बैठे हैं

अताउल हसन

वो सुकून-ए-जिस्म-ओ-जाँ गिर्दाब-ए-जाँ होने को है

अताउल हक़ क़ासमी

थोड़ी सी उस तरफ़ भी नज़र होनी चाहिए

अताउल हक़ क़ासमी

थोड़ी सी इस तरफ़ भी नज़र होनी चाहिए

अताउल हक़ क़ासमी

नुमू-पज़ीर हूँ हर दम कि मुझ में दम है अभी

अता तुराब

यक लम्हा सही उम्र का अरमान ही रह जाए

अता शाद

वतन-आशोब

असरार-उल-हक़ मजाज़

उन का जश्न-ए-साल-गिरह

असरार-उल-हक़ मजाज़

साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

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