दम Poetry (page 54)

वो हवा न रही वो चमन न रहा वो गली न रही वो हसीं न रहे

अकबर इलाहाबादी

मज़हब का हो क्यूँकर इल्म-ओ-अमल दिल ही नहीं भाई एक तरफ़

अकबर इलाहाबादी

ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है

अकबर इलाहाबादी

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है

अकबर इलाहाबादी

दर्द तो मौजूद है दिल में दवा हो या न हो

अकबर इलाहाबादी

अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके

अकबर इलाहाबादी

ये तन घिरा हुआ छोटे से घर में रहता है

अकबर अली खान अर्शी जादह

हुस्न ही के दम से हैं ये कहानियाँ सारी

अकबर अली खान अर्शी जादह

पेश जो आया सर-ए-साहिल शब बतलाया

अजमल सिराज

हम अपने-आप में रहते हैं दम में दम जैसे

अजमल सिराज

इतना करम इतनी अता फिर हो न हो

अजमल सिद्दीक़ी

अलग अलग तासीरें इन की, अश्कों के जो धारे हैं

अजमल सिद्दीक़ी

मौजूद हैं वो भी बालीं पर अब मौत का टलना मुश्किल है

आजिज़ मातवी

भीड़ है बर-सर-ए-बाज़ार कहीं और चलें

ऐतबार साजिद

बंद दरीचे सूनी गलियाँ अन-देखे अनजाने लोग

ऐतबार साजिद

तू ही इंसाफ़ से कह जिस का ख़फ़ा यार रहे

ऐश देहलवी

दोस्त जब दिल सा आश्ना ही नहीं

ऐश देहलवी

मुतमइन अपने यक़ीं पर अगर इंसाँ हो जाए

अहसन मारहरवी

जब तक अपने दिल में उन का ग़म रहा

अहसन मारहरवी

इक नज़र में दर्द खो देना दिल-ए-बीमार का

अहसन मारहरवी

ऐ दिल न सुन अफ़्साना किसी शोख़ हसीं का

अहसन मारहरवी

ख़िदमत-ए-वतन

अहमक़ फफूँदवी

इल्म की ज़रूरत

अहमक़ फफूँदवी

ज़हर को मय न कहूँ मय को गवारा न कहूँ

अहमद ज़फ़र

इल्म का दम भरना छोड़ो भी और अमल को भूल भी जाओ

अहमद शहरयार

दुनिया से हर रिश्ता तोड़ा ख़ुद से रु-गर्दानी की

अहमद शहरयार

आता ही नहीं होने का यक़ीं क्या बात करूँ

अहमद रिज़वान

लब-ए-गोया

अहमद राही

महफ़िल महफ़िल सन्नाटे हैं

अहमद राही

कोई माज़ी के झरोकों से सदा देता है

अहमद राही

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