दूर Poetry (page 15)

मिरे सीं दूर क्या चाहते हैं साया-ए-इश्क़

सिराज औरंगाबादी

यक निगह सें लिया है वो गुलफ़ाम

सिराज औरंगाबादी

पी कर शराब-ए-शौक़ कूँ बेहोश हो बेहोश हो

सिराज औरंगाबादी

इस लब कूँ कब पसंद हैं रस्मी कटोरियाँ

सिराज औरंगाबादी

हिज्र की आग में अज़ाब में न दे

सिराज औरंगाबादी

बात कर दिल सती हिजाब निकाल

सिराज औरंगाबादी

इतना न दूर जाओ कि जीना मुहाल हो

सिरज़ अालम ज़ख़मी

बहार आए तो ख़ुद ही लाला ओ नर्गिस बता देंगे

सिकंदर अली वज्द

जब वो मसरूर नज़र आता है

सिकंदर अली वज्द

बयाबानों पे ज़िंदानों पे वीरानों पे क्या गुज़री

सिकंदर अली वज्द

आग देखूँ कभी जलता हुआ बिस्तर देखूँ

सिद्दीक़ मुजीबी

गीत ख़ुशी का गाओ

सिद्दीक़ कलीम

दुख

सिद्दीक़ कलीम

अजनबी राह-गुज़र

सिद्दीक़ कलीम

हवा-ए-इश्क़ में शामिल हवस की लू ही रही

सिद्दीक़ अफ़ग़ानी

कुछ ऐसे दौर भी ताहम गिरफ़्त में आए

सिद्दीक़ शाहिद

ये रोज़ ओ शब का तसलसुल रवाँ-दवाँ ही रहा

सिद्दीक़ शाहिद

तंग आ गए हैं कश्मकश-ए-आशियाँ से हम

बाबू सि द्दीक़ निज़ामी

मुद्दतों में घर हमारे आज यार आ ही गया

बाबू सि द्दीक़ निज़ामी

लोगों ने हम को शहर का क़ाज़ी बना दिया

शुजा ख़ावर

हालत उसे दिल की न दिखाई न ज़बाँ की

शुजा ख़ावर

छोड़िए बाक़ी भी क्या रक्खा है उन के क़हर में

शुजा ख़ावर

ज़रा सब्र!

शोरिश काश्मीरी

इक़बाल से हम-कलामी

शोरिश काश्मीरी

वो जिस के दिल में निहाँ दर्द दो-जहाँ का था

शोला हस्पानवी

मैं जब्हा सा हूँ उस दर-ए-आली-मक़ाम का

शोला अलीगढ़ी

जाने क्या बात है मानूस बहुत लगता है

शोहरत बुख़ारी

हम शहर में इक शम्अ की ख़ातिर हुए बर्बाद

शोहरत बुख़ारी

हम पी गए सब हिले न लब तक

शोहरत बुख़ारी

हम पी गए सब हिले न अब तक

शोहरत बुख़ारी

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