दूर Poetry (page 56)

किस के सपनों से मिरी नींद सजी रहती है

दिनेश नायडू

इक हरे ख़त में कोई बात पुरानी पढ़ना

दिनेश नायडू

रिश्वत-ख़ोर सरकारी मुलाज़मीन

दिलावर फ़िगार

मर्दुम-गज़ीदा इंसान का इलाज

दिलावर फ़िगार

लग गए हैं फ़ोन लगने में जो पच्चीस साल

दिलावर फ़िगार

कराची की बस

दिलावर फ़िगार

कराची का क़ब्रिस्तान

दिलावर फ़िगार

कहा लैला की माँ ने

दिलावर फ़िगार

इलिएट्स-गर्ल्स-कॉलेज और कुल पाक ओ हिन्द मुशाएरा

दिलावर फ़िगार

सियाह ज़ुल्फ़ को जो बन-सँवर के देखते हैं

दिलावर फ़िगार

ज़मीन अपने ही मेहवर से हट रही होगी

दिलावर अली आज़र

मैं सुर्ख़ फूल को छू कर पलटने वाला था

दिलावर अली आज़र

बोझ उठाए हुए दिन रात कहाँ तक जाता

दिलावर अली आज़र

तमकीं है और हुस्न-ए-गरेबाँ है और हम

दिल शाहजहाँपुरी

मय-ए-कौसर का असर चश्म-ए-सियह-फ़ाम में है

दिल शाहजहाँपुरी

क्या कहिए दास्तान-ए-तमन्ना बदल गई

दिल शाहजहाँपुरी

फिर मरहला-ए-ख़्वाब-ए-बहाराँ से गुज़र जा

दिल अय्यूबी

मैं सिर्फ़ वो नहीं जो नज़र आ गया तुझे

दिल अय्यूबी

इश्क़ के रस्ते चलते चलते हम ऐसे मजबूर हुए

देवमणि पांडेय

दिल ने चाहा बहुत और मिला कुछ नहीं

देवमणि पांडेय

वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है

दीप्ति मिश्रा

दोनों में कितना फ़र्क़ मगर दोनों का हासिल तन्हाई

दीप्ति मिश्रा

आसानी में जीने में तो ख़र्चा लगता है

दीपक शर्मा दीप

मिरी बे-क़रारी मिरी आह-ओ-ज़ारी ये वहशत नहीं है तो फिर और क्या है

द्वारका दास शोला

इंसाँ ब-यक निगाह बुरा भी भला भी है

द्वारका दास शोला

निगाह-ए-यार सूँ हासिल है मुझ कूँ मय-नोशी

दाऊद औरंगाबादी

मस्त हूँ मस्त हूँ ख़राब ख़राब

दाऊद औरंगाबादी

जब परी-रू हिजाब करते हैं

दाऊद औरंगाबादी

सूरत-ए-हाल अब तो वो नक़्श-ए-ख़याली हो गया

दत्तात्रिया कैफ़ी

तिरे बग़ैर

दर्शिका वसानी

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