दूर Poetry (page 55)

मंज़र-ए-वक़्त की यकसानी में बैठा हुआ हूँ

एजाज़ गुल

जो क़िस्सा-गो ने सुनाया वही सुना गया है

एजाज़ गुल

इतना तिलिस्म याद के चक़माक़ में रहा

एजाज़ गुल

हम तुम जब भी प्यार करेंगे जान-ओ-दिल सदक़े होंगे

एजाज़ गुल

दर खोल के देखूँ ज़रा इदराक से बाहर

एजाज़ गुल

कतबा

एजाज़ फ़ारूक़ी

बीमारी की ख़बर

एहतिशाम हुसैन

अक़्ल पहुँची जो रिवायात के काशाने तक

एहतिशाम हुसैन

सुर्ख़ मौसम की कहानी है पुरानी हो न हो

एहतराम इस्लाम

फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली

एहतराम इस्लाम

फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली

एहतराम इस्लाम

याद तेरी जो कभी आती है बहलाने को

एहसान दरबंगावी

ख़याल के फूल खिल रहे हैं बहार के गीत गा रहा हूँ

एहसान दरबंगावी

किसे ख़बर थी कि ये दौर-ए-ख़ुद-ग़रज़ इक दिन

एहसान दानिश

परस्तिश-ए-ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं

एहसान दानिश

न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को

एहसान दानिश

कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर

एहसान दानिश

कल रात कुछ अजीब समाँ ग़म-कदे में था

एहसान दानिश

जीने के लिए जो मर रहे हैं

एहसान दानिश

जबीं की धूल जिगर की जलन छुपाएगा

एहसान दानिश

जब भी ख़ल्वत में वो याद आएगा

एहसान दानिश

इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर

एहसान दानिश

दिल की रग़बत है जब आप ही की तरफ़

एहसान दानिश

आया नहीं है राह पे चर्ख़-ए-कुहन अभी

एहसान दानिश

मंज़र है अभी दूर ज़रा हद्द-ए-नज़र से

डॉ. पिन्हाँ

है निगाहों में कोह-ए-तूर मियाँ

डॉक्टर आज़म

अक़्ल कितनी शुऊ'र कितना है

डॉक्टर आज़म

इस दौर-ए-तरक़्क़ी के अंदाज़ निराले हैं

दिवाकर राही

रात से दिन का वो जो रिश्ता थी

दिनेश नायडू

मिरे कमरे में पूरी चाँदनी है

दिनेश नायडू

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