दूर Poetry (page 57)

क्या वहीं मिलोगे तुम

दर्शिका वसानी

बुढ़ापे की चोटी

दर्शिका वसानी

निगाह-ए-मस्त-ए-साक़ी का सलाम आया तो क्या होगा

दर्शन सिंह

किसी की शाम-ए-सादगी सहर का रंग पा गई

दर्शन सिंह

कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला

दर्शन सिंह

चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं

दर्शन सिंह

क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

बिला-जवाज़ नहीं है फ़लक से जंग मिरी

दानियाल तरीर

सितम के बा'द भी बाक़ी करम की आस तो है

दानिश फ़राही

शीशे से ज़ियादा नाज़ुक था ये शीशा-ए-दिल जो टूट गया

दानिश फ़राही

कुछ अपने दौर की भी कहानी लिखा करो

दानिश फ़राही

चाक हो पर्दा-ए-वहशत मुझे मंज़ूर नहीं

दाग़ देहलवी

क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है

दाग़ देहलवी

कहते हैं जिस को हूर वो इंसाँ तुम्हीं तो हो

दाग़ देहलवी

हाथ निकले अपने दोनों काम के

दाग़ देहलवी

जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

जल्वा-ए-हुस्न से है सूरत-ए-औक़ात नई

चरख़ चिन्योटी

जब सर-ए-बाम वो ख़ुर्शीद-जमाल आता है

चरख़ चिन्योटी

फ़ज़ा में कैफ़-फ़शाँ फिर सहाब है साक़ी

चरख़ चिन्योटी

समंदर का सुकूत

चन्द्रभान ख़याल

नींद के तआक़ुब में

चन्द्रभान ख़याल

जंग

चन्द्रभान ख़याल

वो क्या जवाब दे अर्ज़-ए-सवाल से पहले

चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी

नई-देहली

चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी

मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले

चकबस्त ब्रिज नारायण

हुब्ब-ए-क़ौमी

चकबस्त ब्रिज नारायण

उन्हें ये फ़िक्र है हर दम नई तर्ज़-ए-जफ़ा क्या है

चकबस्त ब्रिज नारायण

सोज़-ए-फ़िराक़ दिल में छुपाए हुए हैं हम

बबल्स होरा सबा

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