दूर Poetry (page 59)

रौनक़ फ़रोग़-ए-दर्द से कुछ अंजुमन में है

बेबाक भोजपुरी

बड़ी दिल-शिकन है रह-ए-सफ़र कोई हम-सफ़र है न यार है

बेबाक भोजपुरी

हवा-ए-वहशत दिल ले उड़ी कहाँ से कहाँ

बयान मेरठी

वो दरिया-बार अश्कों की झड़ी है

बयान मेरठी

सुब्ह क़यामत आएगी कोई न कह सका कि यूँ

बयान मेरठी

कहा अग़्यार का हक़ में मिरे मंज़ूर मत कीजो

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

हर तरफ़ सोज़ का अंदाज़ जुदागाना है

बासित भोपाली

कर लिया दिन में काम आठ से पाँच

बासिर सुल्तान काज़मी

हम तेरे पास आ के परेशान हैं बहुत

बशीर फ़ारूक़ी

तज़्किरे में तिरे इक नाम को यूँ जोड़ दिया

बशीर फ़ारूक़ी

अब के जुनूँ में लज़्ज़त-ए-आज़ार भी नहीं

बशीर फ़ारूक़ी

नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं

बशीर बद्र

महलों में हम ने कितने सितारे सजा दिए

बशीर बद्र

चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना

बशीर बद्र

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

बशीर बद्र

वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो

बशीर बद्र

नज़र से गुफ़्तुगू ख़ामोश लब तुम्हारी तरह

बशीर बद्र

मेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे

बशीर बद्र

ख़ानदानी रिश्तों में अक्सर रक़ाबत है बहुत

बशीर बद्र

कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी

बशीर बद्र

बड़े ताजिरों की सताई हुई

बशीर बद्र

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

बशीर बद्र

हम तिरे बंदे हमारा तू ख़ुदा-वंद-ए-करीम

बशीर-उन-निसा बेगम बर्क़

हुई मुद्दतें ऐ दिल-ए-हज़ीं न पयाम है न सलाम है

बशीरुद्दीन राज़

हैराँ है ज़माने में किसे अपना कहे दिल

बशीर मुंज़िर

अच्छे कभी बुरे हैं हालात आदमी के

बशीर मुंज़िर

करोगे याद तो हर बात याद आएगी

बशर नवाज़

ये हुस्न है झरनों में न है बाद-ए-चमन में

बशर नवाज़

जब कभी होंगे तो हम माइल-ए-ग़म ही होंगे

बशर नवाज़

चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो

बशर नवाज़

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