दूर Poetry (page 70)

इस दौर से ख़ुलूस मोहब्बत वफ़ा न माँग

अमीर अहमद ख़ुसरव

तज्दीद

अमीक़ हनफ़ी

जंगल: एक हश्त पहलू तस्वीर

अमीक़ हनफ़ी

जंगल

अमीक़ हनफ़ी

कहने को शम-ए-बज़्म-ए-ज़मान-ओ-मकाँ हूँ मैं

अमीक़ हनफ़ी

है नूर-ए-ख़ुदा भी यहाँ इरफ़ान-ए-ख़ुदा भी

अमीक़ हनफ़ी

मैं तिरी दस्तरस से बहुत दूर था

अमीन राहत चुग़ताई

रंग काला है न है पैकर सियाह

अम्बर शमीम

जहाँ में हर बशर मजबूर हो ऐसा नहीं होता

अम्बर खरबंदा

शब ख़्वाब के जज़ीरों में हँस कर गुज़र गई

अम्बर बहराईची

गुलाब था न कँवल फिर बदन वो कैसा था

अम्बर बहराईची

गीली मिट्टी हाथ में ले कर बैठा हूँ

अम्बर बहराईची

फिर कोई मुश्किल जवाँ होने को है

अमर सिंह फ़िगार

बैठा है सोगवार सितमगर के शहर में

अमर सिंह फ़िगार

बोसा आँखों का जो माँगा तो वो हँस कर बोले

अमानत लखनवी

लुत्फ़ अब ज़ीस्त का ऐ गर्दिश-ए-अय्याम नहीं

अमानत लखनवी

मुनाजात-ए-बेवा

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मर्सिया-ए-देहली-ए-मरहूम

अल्ताफ़ हुसैन हाली

रंज और रंज भी तन्हाई का

अल्ताफ़ हुसैन हाली

मैं तो मैं ग़ैर को मरने से अब इंकार नहीं

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जीते जी मौत के तुम मुँह में न जाना हरगिज़

अल्ताफ़ हुसैन हाली

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

क्या क़यामत है कि तेरी ही तरह से मुझ से

आलोक मिश्रा

बुझती आँखों में तिरे ख़्वाब का बोसा रक्खा

आलोक मिश्रा

ये है ख़ुलासा-ए-इल्म-ए-क़लंदरी कि हयात

अल्लामा इक़बाल

तुलू-ए-इस्लाम

अल्लामा इक़बाल

तराना-ए-हिन्दी

अल्लामा इक़बाल

रूह-ए-अर्ज़ी आदम का इस्तिक़बाल करती है

अल्लामा इक़बाल

मार्च 1907

अल्लामा इक़बाल

ला-इलाहा-इल्लल्लाह

अल्लामा इक़बाल

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