दवा Poetry (page 3)

ज़िंदगी क्या है इक सफ़र के सिवा

सूफ़ी तबस्सुम

ये क्या कि इक जहाँ को करो वक़्फ़-ए-इज़्तिराब

सूफ़ी तबस्सुम

किसी में ताब-ए-अलम नहीं है किसी में सोज़-ए-वफ़ा नहीं है

सूफ़ी तबस्सुम

मेरे दुख की कोई दवा न करो

सुदर्शन फ़ाकिर

सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं

सुदर्शन फ़ाकिर

मेरे दुख की कोई दवा न करो

सुदर्शन फ़ाकिर

किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी

सुदर्शन फ़ाकिर

दुनिया से वफ़ा कर के सिला ढूँढ रहे हैं

सुदर्शन फ़ाकिर

बहते पानी की तरह मौज-ए-सदा की सूरत

सोज़ नजीबाबादी

वो ज़कात-ए-दौलत-ए-सब्र भी मिरे चंद अश्कों के नाम से

सिराज लखनवी

जब समाअ'त ही न हो उस की तो है बेकार शरह

श्याम सुंदर लाल बर्क़

शुक्र को शिकवा-ए-जफ़ा समझे

शोला अलीगढ़ी

ज़िंदा रहे तो हम को न पहचान दी गई

शमशाद शाद

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

ज़ौक़

ये इक़ामत हमें पैग़ाम-ए-सफ़र देती है

ज़ौक़

उस संग-ए-आस्ताँ पे जबीन-ए-नियाज़ है

ज़ौक़

मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

ज़ौक़

क्या ग़रज़ लाख ख़ुदाई में हों दौलत वाले

ज़ौक़

अज़ीज़ो इस को न घड़ियाल की सदा समझो

ज़ौक़

फ़स्ल-ए-गुल साथ लिए बाग़ में क्या आती है

शैख़ अली बख़्श बीमार

बुतो ये शीशा-ए-दिल तोड़ दो ख़ुदा के लिए

शैख़ अली बख़्श बीमार

ये काएनात तिरा मोजज़ा लगे है मुझे

शहज़ाद रज़ा लम्स

वो नियाज़-ओ-नाज़ के मरहले निगह-ओ-सुख़न से चले गए

शाज़ तमकनत

वो सनम ख़ूगर-ए-वफ़ा न हुआ

शौक़ देहलवी मक्की

कुतिया

शारिक़ कैफ़ी

इंतिहा तक बात ले जाता हूँ मैं

शारिक़ कैफ़ी

अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है

शमीम हनफ़ी

किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा

शकील बदायुनी

जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं

शकील बदायुनी

कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ' नहीं है

शकील बदायुनी

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