देख Poetry (page 25)

हो चुकी बाग़ में बहार अफ़सोस

शाह नसीर

हरम को शैख़ मत जा है बुत-ए-दिल-ख़्वाह सूरत में

शाह नसीर

गो सियह-बख़्त हूँ पर यार लुभा लेता है

शाह नसीर

इक क़ाफ़िला है बिन तिरे हम-राह सफ़र में

शाह नसीर

दिल में है क्या जानिए किस का ख़याल-ए-नक़्श-ए-पा

शाह नसीर

दिल को किस सूरत से कीजे चश्म-ए-दिलबर से जुदा

शाह नसीर

दिल जल्वा-गाह-ए-सूरत-ए-जानाना हो गया

शाह नसीर

दम ले ऐ कोहकन अब तेशा-ज़नी ख़ूब नहीं

शाह नसीर

बा'द-ए-मजनूँ क्यूँ न हूँ मैं कार-फ़रमा-ए-जुनूँ

शाह नसीर

सदियों तुम्हारी याद में शमएँ जलाएँगे

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

अब जा कर एहसास हुआ है प्यार भी करना था

शफ़ीक़ सलीमी

कली पर मुस्कुराहट आज भी मालूम होती है

शफ़ीक़ जौनपुरी

ये इश्क़ भी अजीब है इक आन हो गया

शफ़क़ सुपुरी

सर-ए-तस्लीम ख़म करना पड़ा तक़्सीर से पहले

शायर फतहपुरी

गुल याद न अमवाज-ए-नसीम-ए-सहरी याद

शायर फतहपुरी

जान जोखिम से किए सर जो मराहिल तू ने

शादाब उल्फ़त

ज़रा देखना ख़ाकसारी हमारी

शाद लखनवी

न जान कर गुल-ए-बाज़ी बहुत उछाल के फेंक

शाद लखनवी

क्या कहूँ ग़ुंचा-ए-गुल नीम-दहाँ है कुछ और

शाद लखनवी

जो बीच में आइना हो प्यारे इधर हमारे उधर तुम्हारे

शाद लखनवी

इश्क़ में ज़ोर उम्र-भर मारा

शाद लखनवी

हम वो नालाँ हैं बोली-ठोली में

शाद लखनवी

गोश कर फ़रियाद-ए-आशिक़ जान कर

शाद लखनवी

गले लिपटे हैं वो बिजली के डर से

शाद लखनवी

बोलना बादा-कशों से न ज़रा ऐ वाइज़

शाद लखनवी

अक़्लीम-ए-दिल पे इश्क़ की फ़रमाँ-रवाइयाँ

शाद बिलगवी

कहते हैं अहल-ए-होश जब अफ़्साना आप का

शाद अज़ीमाबादी

जैसे मिरी निगाह ने देखा न हो कभी

शाद अज़ीमाबादी

इज़हार-ए-मुद्दआ का इरादा था आज कुछ

शाद अज़ीमाबादी

तेरी ज़ुल्फ़ें ग़ैर अगर सुलझाएगा

शाद अज़ीमाबादी

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