दिल Poetry (page 14)
बहार कौन सी तुझ में जमाल-ए-यार न थी
ज़ेब ग़ौरी
और गुलों का काम नहीं होता कोई
ज़ेब ग़ौरी
अक्स-ए-फ़लक पर आईना है रौशन आब ज़ख़ीरों का
ज़ेब ग़ौरी
आलम से फ़ुज़ूँ तेरा आलम नज़र आता है
ज़ेब ग़ौरी
तू अपने जैसा अछूता ख़याल दे मुझ को
ज़रीना सानी
ऐ संग-ए-राह आबला-पाई न दे मुझे
ज़रीना सानी
आबला-पाई है महरूमी है रुस्वाई है
ज़रीना सानी
क़ैस कहता था यही फ़िक्र है दिन-रात मुझे
ज़रीफ़ लखनवी
महशरिस्तान-ए-जुनूँ में दिल-ए-नाकाम आया
ज़रीफ़ लखनवी
करेंगे सब ये दा'वा नक़्द-ए-दिल जो हार बैठे हैं
ज़रीफ़ लखनवी
मैकनिक शाएर
ज़रीफ़ जबलपूरी
फ़िल्मी इश्क़
ज़रीफ़ जबलपूरी
न आँसुओं में कभी था न दिल की आह में है
ज़मीर काज़मी
मेरे ख़ुर्शीद ओ क़मर आए नहीं
ज़मीर अज़हर
ख़ून के जो रिश्ते थे बन गए अज़ाब-ए-जाँ
ज़मीर अतरौलवी
ये कैसा काम ऐ दस्त-ए-मसीह कर डाला
ज़मीर अतरौलवी
अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है
ज़मीर अतरौलवी
पुर-हौल जंगलों की सदा मेरे साथ है
ज़मान कंजाही
नज़र में कैसा मंज़र बस गया है
ज़मान कंजाही
मैं रतजगों के मुकम्मल अज़ाब देखूँगा
ज़मान कंजाही
ख़ुद अपनी सोच के पंछी न अपने बस में रहे
ज़मान कंजाही
ज़िंदगी यूँ भी कभी मुझ को सज़ा देती है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
उस ने निगाह-ए-लुत्फ़-ओ-करम बार बार की
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
उरूज उस के लिए था ज़वाल मेरे लिए
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
सुकूत-ए-शब में दिल-ए-दाग़-दाग़ रौशन है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
सभी को ख़्वाहिश-ए-तस्ख़ीर-ए-शौक़-ए-हुक्मरानी है
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
रात का हुस्न भला कब वो समझता होगा
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
पुर-नूर ख़यालों की बरसात तिरी बातें
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
पेट की आग में बरबाद जवानी कर के
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
लबों की जुम्बिश नवा-ए-बुलबुल है शोख़ लहजा तिरा क़यामत
ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर
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