दिल Poetry (page 12)

आँसू की वजह

ज़ीशान साहिल

आख़िरी ख़्वाहिश

ज़ीशान साहिल

आधी ज़िंदगी

ज़ीशान साहिल

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ज़ीशान साहिल

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ज़ीशान साहिल

फूलों की अंजुमन में बहुत देर तक रहा

ज़ीशान साहिल

मैं उस की अंजुमन में अकेला नहीं गया

ज़ीशान साहिल

कोई क़ुसूर नहीं मेरी ख़ुश-गुमानी का

ज़ीशान साहिल

किसी की देन है लेकिन मिरी ज़रूरत है

ज़ीशान साहिल

किस क़दर महदूद कर देता है ग़म इंसान को

ज़ीशान साहिल

जो मेरे बस में है उस से ज़ियादा क्या करना

ज़ीशान साहिल

इश्क़ की दीवानगी मिट जाएगी

ज़ीशान साहिल

ग़ुबार दिल से निकाला नज़र को साफ़ किया

ज़ीशान साहिल

गर्द-ए-सफ़र में राह ने देखा नहीं मुझे

ज़ीशान साहिल

ऐसा लगता है जैसे पूरी है

ज़ीशान साहिल

सर उठाया मज़हबी दीवार पर पटका हुआ

ज़िशान इलाही

हम बे-घरों के दिल में जगाती है डर गली

ज़िशान इलाही

दिल धुआँ देने लगे आँख पिघलने लग जाए

ज़ीशान अतहर

वक़्त की बर्फ़ है हर तौर पिघलने वाली

ज़ीशान साजिद

काम इतने हैं कि आराम नहीं जानते हैं

ज़ीशान साजिद

दीवार-ओ-दर थे जान सराए निकल गए

ज़ीशान साजिद

ऐसा है कौन जो मुझे हक़ तक रसाई दे

ज़ेबुन्निसा ज़ेबी

हुआ है इश्क़ में कम हुस्न-ए-इत्तिफ़ाक़ ऐसा

ज़ेबा

बुतान-ए-हिन्द मिरे दिल में हैं दर आए हुए

ज़ेबा

आप को खो के तुम को ढूँढ लिया

ज़ेबा

न होगा हश्र महशर में बपा क्या

ज़ेबा

क्यूँ हो न गिर के कासा-ए-तदबीर पाश पाश

ज़ेबा

क्या मिला क़ैस को गर्द-ए-रह-ए-सहरा हो कर

ज़ेबा

किस शेर में सना-ए-रुख़-ए-मह-जबीं नहीं

ज़ेबा

जफ़ा-पसंदों को सुनते हैं ना-पसंद हुआ

ज़ेबा

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