दिल Poetry (page 16)

ये जो बिफरे हुए धारे लिए फिरता हूँ मैं

ज़करिय़ा शाज़

ये अलग बात कि चलते रहे सब से आगे

ज़करिय़ा शाज़

उस का ख़याल दिल में घड़ी दो घड़ी रहे

ज़करिय़ा शाज़

संग किसी के चलते जाएँ ध्यान किसी का रक्खें

ज़करिय़ा शाज़

मोहब्बत एक ऐसा रास्ता है

ज़करिय़ा शाज़

हम तुझ से कोई बात भी करने के नहीं थे

ज़करिय़ा शाज़

दिल की लगी दिल वाला जाने

ज़का सिद्दीक़ी

ख़ामोशी ख़ुद अपनी सदा हो ये भी तो हो सकता है

ज़का सिद्दीक़ी

दिल ही सही समझाने वाला

ज़का सिद्दीक़ी

तेरे कहने से में अब लाऊँ कहाँ से नासेह

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

सौंप कर ख़ाना-ए-दिल ग़म को किधर जाते हो

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

गुलशन-ए-ख़ुल्द में हर-चंद कि दिल बहलाया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

फ़ुर्क़त में कार-ए-वस्ल लिया वाह वाह से

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

आप को ख़ून के आँसू ही रुलाना होगा

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

उस पे करना मिरे नालों ने असर छोड़ दिया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

सब से बेहतर है कि मुझ पर मेहरबाँ कोई न हो

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

रात याद-ए-निगह-ए-यार ने सोने न दिया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

क़ाइल भला हों नामा-बरी में सबा के ख़ाक

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

ना-तवानी में पलक को भी हिलाया न गया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

न पर्दा खोलियो ऐ इश्क़ ग़म में तू मेरा

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

क्यूँ आईने में देखा तू ने जमाल अपना

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

क्या कहें हम थे कि या दीदा-ए-तर बैठ गए

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

इस दर पे मुझे यार मचलने नहीं देते

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

हम को उस शोख़ ने कल दर तलक आने न दिया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

अच्छा हुआ कि दम शब-ए-हिज्राँ निकल गया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

लुत्फ़ आता है उन्हें हर ज़ुल्म-ए-नौ-ईजाद में

ज़ैनब बेगम इबरत

तू बेवफ़ा है तिरा ए'तिबार कौन करे

ज़ैग़म हमीदी

मुझ से बढ़ कर है कहीं उन का मक़ाम ऐ साक़ी

ज़ेब उस्मानिया

ख़ुद को दुनिया में जो राज़ी-ब-रज़ा कहते हैं

ज़ेब उस्मानिया

नियाज़-ओ-नाज़ के साग़र खनक जाएँ तो अच्छा है

ज़ेब बरैलवी

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