दिल Poetry (page 17)

कुछ ऐसे हाल-ओ-माज़ी तेरे अफ़्साने भी होते हैं

ज़ेब बरैलवी

इश्क़ की मंज़िल में अब तक रस्म मर जाने की है

ज़ेब बरैलवी

इस अदा से इश्क़ का आग़ाज़ होना चाहिए

ज़ेब बरैलवी

गिला नहीं कि किनारों ने साथ छोड़ दिया

ज़ेब बरैलवी

रखी न गई दिल में कोई बात छुपा कर

ज़हरा क़रार

हक़ीक़तों को फ़साना नहीं बनाती मैं

ज़हरा क़रार

हक़ीक़तों को फ़साना नहीं बनाती मैं

ज़हरा क़रार

ज़ब्त-ए-ग़म मुश्किल है और मुश्किल है मुश्किल का जवाब

ज़हीर अहमद ताज

नज़र को वुसअतें दे बिजलियों से आश्ना कर दे

ज़हीर अहमद ताज

नग़्मा के सोज़ से अयाँ दिल का गुदाज़ हो गया

ज़हीर अहमद ताज

मुझ पर सुरूर छा गया बादा-ए-दिल-नवाज़ से

ज़हीर अहमद ताज

मिरे दिल को मोहब्बत ख़ूब गरमाए तो अच्छा हो

ज़हीर अहमद ताज

क्यूँ वो महबूब रू-ब-रू न रहे

ज़हीर अहमद ताज

किसी की याद-ए-रंगीं में है ये दिल बे-क़रार अब तक

ज़हीर अहमद ताज

गेसू-ए-शेर-ओ-अदब के पेच सुलझाता हूँ मैं

ज़हीर अहमद ताज

ऐ मिरी जान-ए-आरज़ू माने-ए-इल्तिफ़ात क्या

ज़हीर अहमद ताज

आसूदा-ए-महफ़िल अभी दम भर न हुआ था

ज़हीर अहमद ताज

कभी इश्क़ साज़-ए-हयात था कभी सोज़-ए-दिल ने जला दिया

ज़ाहिदा ज़ैदी

हिकायत-ए-गुरेज़ाँ

ज़ाहिदा ज़ैदी

दिन का कर्ब

ज़ाहिदा ज़ैदी

मारा हमें इस दौर की आसाँ-तलबी ने

ज़ाहिदा ज़ैदी

कहाँ तक काविश-ए-इसबात-ए-पैहम

ज़ाहिदा ज़ैदी

बू-ए-गुल रक़्स में है बाद-ए-ख़िज़ाँ रक़्स में है

ज़ाहिदा ज़ैदी

हो गए अम्बर-फ़शाँ दोनों-जहाँ मेरे लिए

ज़ाहीदा कमाल

किसी मंज़र के पस-मंज़र में जा कर

ज़ाहिद शम्सी

आजिज़ी को चलन किए हुए हैं

ज़ाहिद शम्सी

'अनीस-नागी' के नाम

ज़ाहिद मसूद

तुम जा चुकी हो

ज़ाहिद इमरोज़

मेरा ग़ुस्सा कहाँ है?

ज़ाहिद इमरोज़

अधूरी मौत कर कर्ब

ज़ाहिद इमरोज़

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