दिल Poetry (page 186)

कोई तो है जो आहों में असर आने नहीं देता

इमरान-उल-हक़ चौहान

अपने लहू में ज़हर भी ख़ुद घोलता हूँ मैं

इमरान-उल-हक़ चौहान

तेरी याद

इमरान शनावर

तेरे दिल से उतर चुका हूँ मैं

इमरान शनावर

कुछ तो ऐ यार इलाज-ए-ग़म-ए-तन्हाई हो

इमरान शनावर

सूदी बेगम

इमरान शमशाद

काला

इमरान शमशाद

तुम ने ये माजरा सुना है क्या

इमरान शमशाद

तेरी मुश्किल किसी को क्या मालूम

इमरान शमशाद

परेशाँ हूँ तिरा चेहरा भुलाया भी नहीं जाता

इमरान साग़र

मैं अपनी हैसियत से कुछ ज़ियादा ले के आया हूँ

इमरान साग़र

मैं अपने हाल-ए-ज़ार का आईना-दार हूँ

इमरान साग़र

कब कहा मैं ने मुझे सारा ज़माना चाहिए

इमरान साग़र

मैं शजर हूँ और इक पत्ता है तू

इमरान हुसैन आज़ाद

मैं सारी उम्र अहद-ए-वफ़ा में लगा रहा

इमरान हुसैन आज़ाद

आसमाँ मिल न सका धरती पे आया न गया

इमरान हुसैन आज़ाद

तुझ से इक हाथ क्या मिला लिया है

इमरान आमी

इस दश्त से आगे भी कोई दश्त-ए-गुमाँ है

इमरान आमी

बात दिल को मिरे लगी नहीं है

इमरान आमी

आख़िर इक दिन सब को मरना होता है

इमरान आमी

काँटों में ही कुछ ज़र्फ़-ए-समाअत नज़र आए

इमदाद निज़ामी

तड़प तड़प के तमन्ना में करवटें बदलीं

इम्दाद इमाम असर

पा रहा है दिल मुसीबत के मज़े

इम्दाद इमाम असर

करता है ऐ 'असर' दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता का गिला

इम्दाद इमाम असर

ज़बान-ए-हाल से हम शिकवा-ए-बेदाद करते हैं

इम्दाद इमाम असर

यूँही उलझी रहने दो क्यूँ आफ़त सर पर लाते हो

इम्दाद इमाम असर

ठिकाना है कहीं जाएँ कहाँ नाचार बैठे हैं

इम्दाद इमाम असर

सूली चढ़े जो यार के क़द पर फ़िदा न हो

इम्दाद इमाम असर

रोते हैं सुन के कहानी मेरी

इम्दाद इमाम असर

क़ैद-ए-तन से रूह है नाशाद क्या

इम्दाद इमाम असर

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