दिल Poetry (page 185)

आसमानों से न उतरेगा सहीफ़ा कोई

इंद्र मोहन मेहता कैफ़

वक़्त ख़ामोश है टूटे हुए रिश्तों की तरह

इन्दिरा वर्मा

शिकस्ता-दिल अँधेरी शब अकेला राहबर क्यूँ हो

इन्दिरा वर्मा

मिरी चाहतों में ग़ुरूर हो दिल-ए-ना-तवाँ में सुरूर हो

इन्दिरा वर्मा

यूँ वफ़ा के सारे निभाओ ग़म कि फ़रेब में भी यक़ीन हो

इन्दिरा वर्मा

ये मौसम सुरमई है और मैं हूँ

इन्दिरा वर्मा

वो अजीब शख़्स था भीड़ में जो नज़र में ऐसे उतर गया

इन्दिरा वर्मा

शिकस्ता-दिल अँधेरी शब अकेला राहबर क्यूँ हो

इन्दिरा वर्मा

मुझे रंग दे न सुरूर दे मिरे दिल में ख़ुद को उतार दे

इन्दिरा वर्मा

काश वो पहली मोहब्बत के ज़माने आते

इन्दिरा वर्मा

दिल के बेचैन जज़ीरों में उतर जाएगा

इन्दिरा वर्मा

अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब

इन्दिरा वर्मा

दिन में जो साथ सब के हँसता था

इंद्र सराज़ी

दिल से दिल का रिश्ता होगा

इंद्र सराज़ी

लिक्खेंगे न इस हार के अस्बाब कहाँ तक

इनाम-उल-हक़ जावेद

वो दिल जिस ने हमें रुस्वा किया था

इनाम नदीम

रास्ते जिस तरफ़ बुलाते हैं

इनाम नदीम

पड़ता था इस ख़याल का साया यहीं कहीं

इनाम नदीम

नहीं मालूम ये क्या कर चुके हैं

इनाम नदीम

ख़ुद अपने उजाले से ओझल रहा है दिया जल रहा है

इनाम नदीम

हमें तो इंतिज़ारी और ही थी

इनाम नदीम

अपनी ही रवानी में बहता नज़र आता है

इनाम नदीम

वो आते-जाते इधर देखता ज़रा सा है

इनाम कबीर

ये क़िस्सा-ए-मुख़्तसर नहीं है

इम्तियाज़-उल-हक़ इम्तियाज़

अजब उलझन है जो समझा नहीं हूँ

इम्तियाज़ अली गौहर

फिर आस-पास से दिल हो चला है मेरा उदास

इम्तियाज़ अली अर्शी

ताराज ख़्वाहिशों का मुदावा न हो सका

इम्तियाज़ अहमद

उस का बदन भी चाहिए और दिल भी चाहिए

इमरान-उल-हक़ चौहान

पयाम ले के हवा दूर तक नहीं जाती

इमरान-उल-हक़ चौहान

मौसम-ए-गुल है तिरे सुर्ख़ दहन की हद तक

इमरान-उल-हक़ चौहान

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