दिल Poetry (page 20)

सख़्त दुश्वार है पहलू में बचाना दिल का

ज़हीर देहलवी

रक़ीबों को हमराह लाना न छोड़ा

ज़हीर देहलवी

रंज राहत-असर न हो जाए

ज़हीर देहलवी

रहता तो है उस बज़्म में चर्चा मिरे दिल का

ज़हीर देहलवी

पान बन बन के मिरी जान कहाँ जाते हैं

ज़हीर देहलवी

नसीहत-गरो दिल लगाया तो होता

ज़हीर देहलवी

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई

ज़हीर देहलवी

कुछ न कुछ रंज वो दे जाते हैं आते जाते

ज़हीर देहलवी

जाते हो तुम जो रूठ के जाते हैं जी से हम

ज़हीर देहलवी

जहाँ में कौन कह सकता है तुम को बेवफ़ा तुम हो

ज़हीर देहलवी

इश्क़ और इश्क़-ए-शोला-वर की आग

ज़हीर देहलवी

हाथ से हैहात क्या जाता रहा

ज़हीर देहलवी

हम-नशीं उन के तरफ़-दार बने बैठे हैं

ज़हीर देहलवी

हाए काफ़िर तिरे हमराह अदू आता है

ज़हीर देहलवी

गुल हुआ ये किस की हस्ती का चराग़

ज़हीर देहलवी

ग़ौग़ा-ए-पंद गो न रहा नौहागर रहा

ज़हीर देहलवी

दिल को दार-उस-सुरूर कहते हैं

ज़हीर देहलवी

दिल को आज़ार लगा वो कि छुपा भी न सकूँ

ज़हीर देहलवी

दिल गया दिल का निशाँ बाक़ी रहा

ज़हीर देहलवी

दे हश्र के वादे पे उसे कौन भला क़र्ज़

ज़हीर देहलवी

बुतों से बच के चलने पर भी आफ़त आ ही जाती है

ज़हीर देहलवी

बिगड़ कर अदू से दिखाते हैं आप

ज़हीर देहलवी

भूल कर हरगिज़ न लेते हम ज़बाँ से नाम-ए-इश्क़

ज़हीर देहलवी

बज़्म-ए-दुश्मन में जा के देख लिया

ज़हीर देहलवी

ऐ मेहरबाँ है गर यही सूरत निबाह की

ज़हीर देहलवी

अभी से आ गईं नाम-ए-ख़ुदा हैं शोख़ियाँ क्या-क्या

ज़हीर देहलवी

सैंकड़ों दिलकश बहारें थीं हमारी मुंतज़िर

ज़हीर अहमद ज़हीर

रात भर फ़ुर्क़त के साए दिल को दहलाते रहे

ज़हीर अहमद ज़हीर

जो ज़ेहन ओ दिल में इकट्ठा था आस का पानी

ज़हीर अहमद ज़हीर

ख़लिश-ए-इश्क़ से बचपन है दिल एक तरफ़

ज़फ़र ताबाँ

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