दिल Poetry (page 242)

अहल-ए-दिल के वास्ते पैग़ाम हो कर रह गई

गणेश बिहारी तर्ज़

जो भर भी जाएँ दिल के ज़ख़्म दिल वैसा नहीं रहता

फ़ुज़ैल जाफ़री

सर-ए-सहरा-ए-दुनिया फूल यूँ ही तो नहीं खिलते

फ़ुज़ैल जाफ़री

साहब दिलों से राह में आँखें मिला के देख

फ़ुज़ैल जाफ़री

निभेगी किस तरह दिल सोचता है

फ़ुज़ैल जाफ़री

नौमीद करे दिल को न मंज़िल का पता दे

फ़ुज़ैल जाफ़री

लफ़्ज़ों का साएबान बना लेने दीजिए

फ़ुज़ैल जाफ़री

कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं

फ़ुज़ैल जाफ़री

कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं

फ़ुज़ैल जाफ़री

है इबारत जो ग़म-ए-दिल से वो वहशत भी न थी

फ़ुज़ैल जाफ़री

दीवाने इतने जम्अ' हुए शहर बन गया

फ़ुज़ैल जाफ़री

दिलों के आइने धुँदले पड़े हैं

फ़ुज़ैल जाफ़री

छू भी तो नहीं सकते हम मौज-ए-सबा बन कर

फ़ुज़ैल जाफ़री

भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कई

फ़ुज़ैल जाफ़री

आतिश-फ़िशाँ ज़बाँ ही नहीं थी बदन भी था

फ़ुज़ैल जाफ़री

उधार

फ़ुर्क़त काकोरवी

ये जो दुश्मन ग़म-ए-निहानी है

फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को

तुझे किस तरह छुड़ाऊँ ख़लिश-ए-ग़म-ए-निहाँ से

फ़िज़ा जालंधरी

ज़ौक़-ए-नज़र को जल्वा-ए-बेताब ले गया

फ़ितरत अंसारी

उन का मंशा है न फैले ख़स-ओ-ख़ाशाक में आग

फ़ितरत अंसारी

तसव्वुर में जमाल-ए-रू-ए-ताबाँ ले के चलता हूँ

फ़ितरत अंसारी

करम के नाम पे उन का इ'ताब चाहते हैं

फ़ितरत अंसारी

बा'द मुद्दत के ख़याल-ए-मय-ओ-मीना आया

फ़ितरत अंसारी

हो गए यार पराए अपने

फ़ीरोज़ा ख़ुसरो

अब नहीं कोई ठिकाना अपना

फ़ीरोज़ा ख़ुसरो

ज़ालिम है वो ऐसा कि जफ़ा भी नहीं करता

फ़िरदौस गयावी

ये सच नहीं कि तमाज़त से डर गई है नदी

फ़िरदौस गयावी

वह ज़ुल्म-ओ-सितम ढाए और मुझ से वफ़ा माँगे

फ़िरदौस गयावी

फिर कभी ये ख़ता नहीं करना

फ़िरदौस गयावी

अभी निकलो न घर से तंग आ के

फ़िराक़ जलालपुरी

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