दिल Poetry (page 295)

ज़र्रे का राज़ मेहर को समझाना चाहिए

बाक़र मेहदी

महफ़िलों में जा के घबराया किए

बाक़र मेहदी

क्या ख़बर थी कि कभी बे-सर-ओ-सामाँ होंगे

बाक़र मेहदी

कौन भला ये कहता है ख़ुद आ के हम को मनाएँ आप

बाक़र मेहदी

जो ज़माने का हम-ज़बाँ न रहा

बाक़र मेहदी

इश्क़ की सारी बातें ऐ दिल पागल-पन की बातें हैं

बाक़र मेहदी

इस दर्जा हुआ ख़ुश कि डरा दिल से बहुत मैं

बाक़र मेहदी

हज़ार चाहा लगाएँ किसी से दिल लेकिन

बाक़र मेहदी

फ़रेब खा के भी शर्मिंदा-ए-सुकूँ न हुए

बाक़र मेहदी

दुश्मन-ए-जाँ कोई बना ही नहीं

बाक़र मेहदी

दर्द-ए-दिल आज भी है जोश-ए-वफ़ा आज भी है

बाक़र मेहदी

चराग़-ए-हसरत-ओ-अरमाँ बुझा के बैठे हैं

बाक़र मेहदी

बुझी बुझी है सदा-ए-नग़्मा कहीं कहीं हैं रबाब रौशन

बाक़र मेहदी

बदल के रख देंगे ये तसव्वुर कि आदमी का वक़ार क्या है

बाक़र मेहदी

औरों पे इत्तिफ़ाक़ से सब्क़त मिली मुझे

बाक़र मेहदी

अश्क मेरे हैं मगर दीदा-ए-नम है उस का

बाक़र मेहदी

अजीब दिल में मिरे आज इज़्तिराब सा है!

बाक़र मेहदी

अब ख़ानुमाँ-ख़राब की मंज़िल यहाँ नहीं

बाक़र मेहदी

देखते देखते सितम तेरा

बाक़र आगाह वेलोरी

रहता है ज़ुल्फ़-ए-यार मिरे मन से मन लगा

बाक़र आगाह वेलोरी

महव-ए-फ़रियाद हो गया है दिल

बाक़र आगाह वेलोरी

लब-ए-जाँ-बख़्श के मीठे का तेरे जो मज़ा पाया

बाक़र आगाह वेलोरी

दिल में दिलदार निहाँ था मुझे मा'लूम न था

बाक़र आगाह वेलोरी

अगरचे दिल को ले साथ अपने आया अश्क मिरा

बाक़र आगाह वेलोरी

एक उलझन रात दिन पलती रही दिल में कि हम

बक़ा बलूच

वा'दे झूटे क़स्में झूटी

बक़ा बलूच

उम्र भर कुछ ख़्वाब दिल पर दस्तकें देते रहे

बक़ा बलूच

कम कम रहना ग़म के सुर्ख़ जज़ीरों में

बक़ा बलूच

जाने क्या सोच के घर तक पहुँचा

बक़ा बलूच

कितना भी मुस्कुराइए दिल है मगर बुझा बुझा

बनो ताहिरा सईद

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