दिल Poetry (page 321)

बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए

असर लखनवी

अश्क-ए-गुल-रंग निसार-ए-ग़म-ए-जानाना करें

असर लखनवी

आप बिक जाए कोई ऐसा ख़रीदार न था

असर लखनवी

आह से जब दिल में डूबे तीर उभारे जाएँगे

असर लखनवी

उदास हो न तू ऐ दिल किसी के रोने से

असर अकबराबादी

है अजब सी कश्मकश दिल में 'असर'

असर अकबराबादी

जाने क्यूँ लोग ग़म से डरते हैं

असर अकबराबादी

सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश

असद रज़ा

तमाशा है कि सब आज़ाद क़ौमें

असद मुल्तानी

इन अक़्ल के बंदों में आशुफ़्ता-सरी क्यूँ है

असद मुल्तानी

कोई दिल-जूई नहीं थी कोई शुनवाई न थी

असद जाफ़री

ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा

असद जाफ़री

जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए

असद भोपाली

न साथी है न मंज़िल का पता है

असद भोपाली

कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते

असद भोपाली

जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए

असद भोपाली

जब अपने पैरहन से ख़ुशबू तुम्हारी आई

असद भोपाली

इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया

असद भोपाली

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

शाख़ से टूट के पत्ते ने ये दिल में सोचा

असअ'द बदायुनी

तल्ख़ियाँ

असअ'द बदायुनी

जो लोग रातों को जागते थे

असअ'द बदायुनी

एक नज़्म

असअ'द बदायुनी

ये लोग ख़्वाब बहुत कर्बला के देखते हैं

असअ'द बदायुनी

यही नहीं कि मिरा घर बदलता जाता है

असअ'द बदायुनी

वो एक नाम जो दरिया भी है किनारा भी

असअ'द बदायुनी

तलब की राहों में सारे आलम नए नए से

असअ'द बदायुनी

सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँ

असअ'द बदायुनी

सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं

असअ'द बदायुनी

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