दिल Poetry (page 320)

कौन था उस के हवा-ख़्वाहों में जो शामिल न था

असग़र गोंडवी

जो नक़्श है हस्ती का धोका नज़र आता है

असग़र गोंडवी

जीने का न कुछ होश न मरने की ख़बर है

असग़र गोंडवी

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

इश्वों की है न उस निगह-ए-फ़ित्ना-ज़ा की है

असग़र गोंडवी

इश्क़ है इक कैफ़-ए-पिन्हानी मगर रंजूर है

असग़र गोंडवी

है दिल-ए-नाकाम-ए-आशिक़ में तुम्हारी याद भी

असग़र गोंडवी

असरार-ए-इश्क़ है दिल-ए-मुज़्तर लिए हुए

असग़र गोंडवी

बात बे-बात उलझते हो भला बात है क्या

असग़र आबिद

जाने लगे हैं अब दम-ए-सर्द आसमाँ तलक

असीर लखनवी

हुस्न-ए-बेपर्दा की गर्मी से कलेजा पक्का

असीर लखनवी

ये हुस्न-ए-दिल-फ़रेब ये आलम शबाब का

असर सहबाई

ख़ुदा की देन है जिस को नसीब हो जाए

असर सहबाई

इलाही कश्ती-ए-दिल बह रही है किस समुंदर में

असर सहबाई

तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए

असर सहबाई

तुम्हारी फ़ुर्क़त में मेरी आँखों से ख़ूँ के आँसू टपक रहे हैं

असर सहबाई

मिरी हर साँस को सब नग़्मा-ए-महफ़िल समझते हैं

असर सहबाई

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

वो जो नहीं हैं बज़्म में बज़्म की शान भी नहीं

असर रामपुरी

तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं

असर लखनवी

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

नवेद-ए-वस्ल-ए-यार आए न आए

असर लखनवी

मुझ को हर फूल सुनाता था फ़साना तेरा

असर लखनवी

किस तरह खिलते हैं नग़्मों के चमन समझा था मैं

असर लखनवी

काहे को ऐसे ढीट थे पहले झूटी क़सम जो खाते तुम

असर लखनवी

इश्क़ की गर्मी-ए-बाज़ार कहाँ से लाऊँ

असर लखनवी

हाए रे प्यारी प्यारी आँख

असर लखनवी

दिल इश्क़ की मय से छलक रहा है

असर लखनवी

चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी

असर लखनवी

भूले अफ़्साने वफ़ा के याद दिल्वाते हुए

असर लखनवी

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