दिल Poetry (page 319)

इस एक बात से गुलचीं का दिल धड़कता है

असग़र सलीम

ग़ुबार सा है सर-ए-शाख़-सार कहते हैं

असग़र सलीम

तारीख़ एक ख़ामोश ज़माना

असग़र नदीम सय्यद

मुझे एक दिन चाहिए

असग़र नदीम सय्यद

मेरे दिल में जंगल है

असग़र नदीम सय्यद

मैं गिरता हूँ

असग़र नदीम सय्यद

जब हम दोनों जुदा हुए थे

असग़र नदीम सय्यद

एक आँच की कमी

असग़र नदीम सय्यद

दिल का फैलाव

असग़र नदीम सय्यद

दिल जारी है

असग़र नदीम सय्यद

धूप-भरी अजरक

असग़र नदीम सय्यद

अपनी रात लय जाओ

असग़र नदीम सय्यद

अभी कुछ दिन लगेंगे

असग़र नदीम सय्यद

आज़ादों का गीत

असग़र नदीम सय्यद

आज तुम ऐसे हँसे

असग़र नदीम सय्यद

आने वाले दौर में जो पाएगा पैग़म्बरी

असग़र मेहदी होश

हुसैन

असग़र मेहदी होश

बे-निशान क़दमों की कहकशाँ पकड़ते हैं

असग़र मेहदी होश

आए थे घर में आग लगाने शरीर लोग

असग़र मेहदी होश

आँखों की नदी सूख गई फिर भी हरा है

असग़र गोरखपुरी

पहली नज़र भी आप की उफ़ किस बला की थी

असग़र गोंडवी

नहीं दैर ओ हरम से काम हम उल्फ़त के बंदे हैं

असग़र गोंडवी

बना लेता है मौज-ए-ख़ून-ए-दिल से इक चमन अपना

असग़र गोंडवी

यूँ न मायूस हो ऐ शोरिश-ए-नाकाम अभी

असग़र गोंडवी

ये इश्क़ ने देखा है ये अक़्ल से पिन्हाँ है

असग़र गोंडवी

तिरे जल्वों के आगे हिम्मत-ए-शरह-ओ-बयाँ रख दी

असग़र गोंडवी

सामने उन के तड़प कर इस तरह फ़रियाद की

असग़र गोंडवी

न खुले उक़्दा-हा-ए-नाज़-ओ-नियाज़

असग़र गोंडवी

मता-ए-ज़ीस्त क्या हम ज़ीस्त का हासिल समझते हैं

असग़र गोंडवी

कोई महमिल-नशीं क्यूँ शाद या नाशाद होता है

असग़र गोंडवी

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