दिल Poetry (page 349)

ये पयाम दे गई है मुझे बाद-ए-सुब्ह-गाही

अल्लामा इक़बाल

ये कौन ग़ज़ल-ख़्वाँ है पुर-सोज़ ओ नशात-अंगेज़

अल्लामा इक़बाल

ये हूरयान-ए-फ़रंगी दिल ओ नज़र का हिजाब

अल्लामा इक़बाल

या रब ये जहान-ए-गुज़राँ ख़ूब है लेकिन

अल्लामा इक़बाल

वही मेरी कम-नसीबी वही तेरी बे-नियाज़ी

अल्लामा इक़बाल

तुझे याद क्या नहीं है मिरे दिल का वो ज़माना

अल्लामा इक़बाल

तू अभी रहगुज़र में है क़ैद-ए-मक़ाम से गुज़र

अल्लामा इक़बाल

तिरी निगाह फ़रोमाया हाथ है कोताह

अल्लामा इक़बाल

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

अल्लामा इक़बाल

शुऊर ओ होश ओ ख़िरद का मोआमला है अजीब

अल्लामा इक़बाल

सख़्तियाँ करता हूँ दिल पर ग़ैर से ग़ाफ़िल हूँ मैं

अल्लामा इक़बाल

परेशाँ हो के मेरी ख़ाक आख़िर दिल न बन जाए

अल्लामा इक़बाल

निगाह-ए-फ़क़्र में शान-ए-सिकंदरी क्या है

अल्लामा इक़बाल

नाला है बुलबुल-ए-शोरीदा तिरा ख़ाम अभी

अल्लामा इक़बाल

न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए

अल्लामा इक़बाल

मुसलमाँ के लहू में है सलीक़ा दिल-नवाज़ी का

अल्लामा इक़बाल

मिटा दिया मिरे साक़ी ने आलम-ए-मन-ओ-तू

अल्लामा इक़बाल

मेरी नवा-ए-शौक़ से शोर हरीम-ए-ज़ात में

अल्लामा इक़बाल

मजनूँ ने शहर छोड़ा तो सहरा भी छोड़ दे

अल्लामा इक़बाल

कुशादा दस्त-ए-करम जब वो बे-नियाज़ करे

अल्लामा इक़बाल

ख़ुदी की शोख़ी ओ तुंदी में किब्र-ओ-नाज़ नहीं

अल्लामा इक़बाल

ख़िरद ने मुझ को अता की नज़र हकीमाना

अल्लामा इक़बाल

करेंगे अहल-ए-नज़र ताज़ा बस्तियाँ आबाद

अल्लामा इक़बाल

कमाल-ए-तर्क नहीं आब-ओ-गिल से महजूरी

अल्लामा इक़बाल

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में

अल्लामा इक़बाल

इश्क़ से पैदा नवा-ए-ज़िंदगी में ज़ेर-ओ-बम

अल्लामा इक़बाल

हुआ न ज़ोर से उस के कोई गरेबाँ चाक

अल्लामा इक़बाल

हज़ार ख़ौफ़ हो लेकिन ज़बाँ हो दिल की रफ़ीक़

अल्लामा इक़बाल

हर इक मक़ाम से आगे गुज़र गया मह-ए-नौ

अल्लामा इक़बाल

हर चीज़ है महव-ए-ख़ुद-नुमाई

अल्लामा इक़बाल

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