दिल Poetry (page 347)

हुस्न की दिलकशी पे नाज़ न कर

आलोक यादव

सरापा तिरा क्या क़यामत नहीं है?

आलोक यादव

खुला है ज़ीस्त का इक ख़ुशनुमा वरक़ फिर से

आलोक यादव

बाज़ ख़त पुर-असर भी होते हैं

आलोक यादव

अंजुमन में जो मिरी इतनी ज़िया है साहब

आलोक यादव

सवालों में ख़ुद भी है डूबी उदासी

आलोक मिश्रा

जज़्ब कुछ तितलियों के पर में है

आलोक मिश्रा

इक अधूरी सी कहानी मैं सुनाता कैसे

आलोक मिश्रा

चीख़ की ओर मैं खिंचा जाऊँ

आलोक मिश्रा

वर्किंग लेडी

अलमास शबी

देर-सवेर तो हो जाती है

अलमास शबी

तुझ को आना पड़ा यहीं तो फिर

अलमास शबी

सवाल कैसे करूँ मैं इस से जवाब है जो मिरी दुआ का

अलमास शबी

लगे जब सुबह की कश्ती किनारे शब

अलमास शबी

जब वो मुझ से कलाम करता है

अलमास शबी

ग़म हँसी में छुपा दिया होगा

अलमास शबी

दिया मुंडेर पे दिल की जला रही हूँ मैं

अलमास शबी

ज़िंदगानी की हक़ीक़त कोहकन के दिल से पूछ

अल्लामा इक़बाल

यही ज़माना-ए-हाज़िर की काएनात है क्या

अल्लामा इक़बाल

तमन्ना दर्द-ए-दिल की हो तो कर ख़िदमत फ़क़ीरों की

अल्लामा इक़बाल

निगाह-ए-इश्क़ दिल-ए-ज़िंदा की तलाश में है

अल्लामा इक़बाल

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़

अल्लामा इक़बाल

मैं जो सर-ब-सज्दा हुआ कभी तो ज़मीं से आने लगी सदा

अल्लामा इक़बाल

मैं जो सर-ब-सज्दा हुआ कभी तो ज़मीं से आने लगी सदा

अल्लामा इक़बाल

ख़ुदावंदा ये तेरे सादा-दिल बंदे किधर जाएँ

अल्लामा इक़बाल

जिन्हें मैं ढूँढता था आसमानों में ज़मीनों में

अल्लामा इक़बाल

फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का

अल्लामा इक़बाल

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब

अल्लामा इक़बाल

अंदाज़-ए-बयाँ गरचे बहुत शोख़ नहीं है

अल्लामा इक़बाल

अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल

अल्लामा इक़बाल

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