दिल Poetry (page 79)

शाम-ए-ग़म की सहर न हो जाए

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

रही दिल की दिल में ज़बाँ तक न पहुँची

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

ख़ून-ए-दिल होता रहा ख़ून-ए-जिगर होता रहा

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

जब तिरा आसरा नहीं मिलता

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

नज़र बहार न देखे तो बे-क़रार न हो

शिव दयाल सहाब

मुझ को कहाँ ये होश तिरी जल्वा-गाह में

शिव दयाल सहाब

'मीर' का सोज़-ए-बयाँ हो तो ग़ज़ल होती है

शिव दयाल सहाब

दाग़ हुस्न-ए-क़मर भी होता है

शिव दयाल सहाब

अंदोह-ए-बेश-ओ-कम न ग़म-ए-ख़ैर-ओ-शर में है

शिव दयाल सहाब

शो'ला-ख़ेज़-ओ-शो'ला-वर अब हर रह-ए-तदबीर है

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

साक़ी-ए-दौराँ कहाँ वो तेरे मय-ख़ाने गए

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

न जब तक दर्द-ए-इंसाँ से किसी को आगही होगी

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

न है उस को मुझ से ग़फ़लत न वो ज़िम्मेदार कम है

शिफ़ा कजगावन्वी

आप जाते तो हैं उस बज़्म में 'शिबली' लेकिन

शिबली नोमानी

यार को रग़बत-ए-अग़्यार न होने पाए

शिबली नोमानी

तीस दिन के लिए तर्क-ए-मय-ओ-साक़ी कर लूँ

शिबली नोमानी

तीर-ए-क़ातिल का ये एहसाँ रह गया

शिबली नोमानी

पूछते क्या हो जो हाल-ए-शब-ए-तन्हाई था

शिबली नोमानी

असर के पीछे दिल-ए-हज़ीं ने निशान छोड़ा न फिर कहीं का

शिबली नोमानी

मिरी आह बे-असर है मैं असर कहाँ से लाऊँ

शेवन बिजनौरी

मौसम भी ख़ुश-गवार ज़माना भी रास है

शेवन बिजनौरी

होती है लबों पर ख़ामोशी आँखों में मोहब्बत होती है

शेवन बिजनौरी

तमन्ना है यही दिल की वहीं चलिए वहीं चलिए

शेरी भोपाली

अभी तो दिल में हल्की सी ख़लिश महसूस होती है

शेरी भोपाली

हंगामा है न फ़ित्ना-ए-दौराँ है आज-कल

शेरी भोपाली

ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए

शेरी भोपाली

वो जब तक अंजुमन में जल्वा फ़रमाने नहीं आते

शेर सिंह नाज़ देहलवी

वो हद से दूर होते जा रहे हैं

शेर सिंह नाज़ देहलवी

शब-ए-फ़िराक़ जो दिल में ख़याल-ए-यार रहा

शेर सिंह नाज़ देहलवी

क़ुल्ज़ुम-ए-उल्फ़त में वो तूफ़ान का आलम हुआ

शेर सिंह नाज़ देहलवी

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