दुनिया Poetry (page 46)

आप से है मुक़ाबला दर-पेश

रहमान जामी

साथ ले कर अपनी बर्बादी के अफ़्साने गए

राही शहाबी

न शिकवे हैं न फ़रियादें न आहें हैं न नाले हैं

राही शहाबी

दिल वाले हैं हम रस्म-ए-वफ़ा हम से मिली है

राही शहाबी

दिल वाले हैं हम रस्म-ए-वफ़ा हम से मिली है

राही शहाबी

हाँ उन्हीं लोगों से दुनिया में शिकायत है हमें

राही मासूम रज़ा

तश्बीब

राही मासूम रज़ा

जूही का पौदा

राही मासूम रज़ा

लोग यक-रंगी-ए-वहशत से भी उकताए हैं

राही मासूम रज़ा

कहाँ न-जाने चला गया इंतिज़ार कर के

इरफ़ान सत्तार

कभी किसी से न हम ने कोई गिला रक्खा

इरफ़ान सत्तार

ग़मों में कुछ कमी या कुछ इज़ाफ़ा कर रहे हैं

इरफ़ान सत्तार

एक दुनिया की कशिश है जो इधर खींचती है

इरफ़ान सत्तार

चुप है आग़ाज़ में, फिर शोर-ए-अजल पड़ता है

इरफ़ान सत्तार

अब तिरे लम्स को याद करने का इक सिलसिला और दीवाना-पन रह गया

इरफ़ान सत्तार

वो कैसे लोग होते हैं जिन्हें हम दोस्त कहते हैं

इरफ़ान अहमद मीर

रस्म-ए-उल्फ़त से है मक़्सूद-ए-वफ़ा हो कि न हो

इरफ़ान अहमद मीर

हम बाग़-ए-तमन्ना में दिन अपने गुज़ार आए

इरम लखनवी

हर बात जो न होना थी ऐसी हुई कि बस

इक़बाल उमर

सदा फ़रियाद की आए कहीं से

इक़बाल सुहैल

पता कैसे चले दुनिया को क़स्र-ए-दिल के जलने का

इक़बाल साजिद

बे-ख़बर दुनिया को रहने दो ख़बर करते हो क्यूँ

इक़बाल साजिद

मिरी ख़्वाहिश है दुनिया को भी अपने साथ ले आऊँ

इक़बाल नवेद

अगरचे पार काग़ज़ की कभी कश्ती नहीं जाती

इक़बाल नवेद

जब शाख़-ए-तमन्ना पे कोई फूल खिला है

इक़बाल मिनहास

बख़्शे न गए एक को बख़्शा न कभी

इक़बाल ख़ुसरो क़ादरी

करें हिजरत तो ख़ाक-ए-शहर भी जुज़-दान में रख लें

इक़बाल कौसर

पाता हूँ इज़्तिराब रुख़-ए-पुर-हिजाब में

इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल

निगाहों से मेरी निगाहें बचाए

इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल

इश्क़ इतना कमाल रखता है

इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल

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