दुनिया Poetry (page 91)

काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा

अली सरदार जाफ़री

इक सुब्ह है जो हुई नहीं है

अली सरदार जाफ़री

दिल की आग जवानी के रुख़्सारों को दहकाए है

अली सरदार जाफ़री

चश्मा-ए-बद-मस्त को फिर शेवा-ए-दिल-दारी दे

अली सरदार जाफ़री

बैठे हैं जहाँ साक़ी पैमाना-ए-ज़र ले कर

अली सरदार जाफ़री

होली

अली जव्वाद ज़ैदी

भूलती हुई याद

अली जव्वाद ज़ैदी

ज़ुल्मत-कदों में कल जो शुआ-ए-सहर गई

अली जव्वाद ज़ैदी

तिरे दयार में कोई ग़म-आश्ना तो नहीं

अली जव्वाद ज़ैदी

राह-ए-उल्फ़त में मिले ऐसे भी दीवाने मुझे

अली जव्वाद ज़ैदी

मैं कब से मरा अपने अंदर पड़ा हूँ

अली इमरान

रंग-ए-महफ़िल से फ़ुज़ूँ-तर मिरी हैरानी है

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

चमन में वो फ़रामोशी का मौसम था मैं ख़ुद को भी

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

बर-सर-ए-बाद हुआ अपना ठिकाना सर-ए-राह

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

सफ़ीर-ए-लैला-2

अली अकबर नातिक़

मैं अपने वक़्त में अपनी रिदा में रहता हूँ

अली अकबर अब्बास

ख़िज़ाँ की ज़र्द सी रंगत बदल भी सकती है

अलीना इतरत

गर्दिश-ए-मय का इस पर न होगा असर मस्त आँखों का जादू जिसे याद है

अलीम उस्मानी

अब जाम निगाहों के नशा क्यूँ नहीं देते

अलीम उस्मानी

हमें दुनिया में अपने ग़म से मतलब

अलीम अख़्तर

मोहब्बत क्या मोहब्बत का सिला क्या

अलीम अख़्तर

उर्दू

आलम मुज़फ्फ़र नगरी

तिरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ

आलम ख़ुर्शीद

नए सिरे से कोई सफ़र आग़ाज़ नहीं करता

आलम ख़ुर्शीद

कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है

आलम ख़ुर्शीद

जमा हुआ है फ़लक पे कितना ग़ुबार मेरा

आलम ख़ुर्शीद

जल बुझा हूँ मैं मगर सारा जहाँ ताक में है

आलम ख़ुर्शीद

मैं नहीं हूँ नहीं कहीं भी नहीं

अकरम नक़्क़ाश

खुली और बंद आँखों से उसे तकता रहा मैं भी

अकरम नक़्क़ाश

दश्त को ढूँडने निकलूँ तो जज़ीरा निकले

अकरम नक़्क़ाश

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