दुनिया Poetry (page 93)

किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में

अख़्तर सईद ख़ान

कौन जीने के लिए मरता रहे

अख़्तर सईद ख़ान

तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

सैर-गाह-ए-दुनिया का हासिल-ए-तमाशा क्या

अख़्तर सईद ख़ान

निगाहें मुंतज़िर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

नैरंगी-ए-नशात-ए-तमन्ना अजीब है

अख़्तर सईद ख़ान

मआल-ए-गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार कुछ भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

लब-ए-सुकूत पे इक हर्फ़-ए-बे-नवा भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

कैसे समझाऊँ नसीम-ए-सुब्ह तुझ को क्या हूँ मैं

अख़्तर सईद ख़ान

दिल की राहें ढूँडने जब हम चले

अख़्तर सईद ख़ान

मैं मुंतज़िर हूँ तेरी तमन्ना लिए हुए

अख़्तर ओरेनवी

तुम अपनी ज़बाँ ख़ाली कर के ऐ नुक्ता-वरो पछताओगे

अख़तर मुस्लिमी

न समझ सकी जो दुनिया ये ज़बान-ए-बे-ज़बानी

अख़तर मुस्लिमी

माइल-ए-लुत्फ़ है आमादा-ए-बे-दाद भी है

अख़तर मुस्लिमी

आँसुओं के तूफ़ाँ में बिजलियाँ दबी रखना

अख़तर मुस्लिमी

रौनक़ ही नहीं उस की हम रूह-ओ-रवाँ भी हैं

अख्तर लख़नवी

अब दर्द का सूरज कभी ढलता ही नहीं है

अख्तर लख़नवी

दिल वो प्यासा है कि दरिया का तमाशा देखे

अख़तर इमाम रिज़वी

अश्क जब दीदा-ए-तर से निकला

अख़तर इमाम रिज़वी

नज़्म

अख़्तर हुसैन जाफ़री

शिकारी रात भर बैठे रहे ऊँची मचानों पर

अख़्तर होशियारपुरी

मैं ने यूँ देखा उसे जैसे कभी देखा न था

अख़्तर होशियारपुरी

चेहरे के ख़द्द-ओ-ख़ाल में आईने जड़े हैं

अख़्तर होशियारपुरी

जिस ने दुनिया भर के ग़म अपनाए थे

अख़्तर फ़िरोज़

नफ़रतों से चेहरा चेहरा गर्द था

अख़्तर फ़िरोज़

ख़ुद-फ़रामोश जो पाया है मुझे दुनिया ने

अख़तर बस्तवी

नज़र से सफ़्हा-ए-आलम पे ख़ूनीं दास्ताँ लिखिए

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

नहीं आसान तर्क-ए-इश्क़ करना दिल से ग़म जाना

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

न राज़-ए-इब्तिदा समझो न राज़-ए-इंतिहा समझो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

दूर तक रौशनी है ग़ौर से देख

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

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