शोक Poetry (page 37)

जाम गर्दिश में है दर-बंद हैं मय-ख़ानों के

शकील बदायुनी

इश्क़ की चिंगारियों को फिर हवा देने लगे

शकील बदायुनी

इश्क़ का कोई ख़ैर-ख़्वाह तो है

शकील बदायुनी

हम हैं और उन की ख़ुशी है आज-कल

शकील बदायुनी

हक़ीक़त-ए-ग़म-ए-उल्फ़त छुपा रहा हूँ मैं

शकील बदायुनी

हंगामा-ए-ग़म से तंग आ कर इज़हार-ए-मसर्रत कर बैठे

शकील बदायुनी

गुलशन हो निगाहों में तो जन्नत न समझना

शकील बदायुनी

ग़म-ए-इश्क़ रह गया है ग़म-ए-जुस्तुजू में ढल कर

शकील बदायुनी

ग़म-ए-हयात भी आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार में है

शकील बदायुनी

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ

शकील बदायुनी

दिल वही दिल जिसे नाशाद किए जाता हूँ

शकील बदायुनी

दिल में किसी ख़लिश का गुज़र चाहता हूँ मैं

शकील बदायुनी

दिल लज़्ज़त-ए-निगाह करम पा के रह गया

शकील बदायुनी

चाँदनी में रुख़-ए-ज़ेबा नहीं देखा जाता

शकील बदायुनी

बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी है

शकील बदायुनी

बे-ख़ुदी है न होशियारी है

शकील बदायुनी

बे-कसी से मरने मरने का भरम रह जाएगा

शकील बदायुनी

बेकार गई आड़ तिरे पर्दा-ए-दर की

शकील बदायुनी

बस इक निगाह-ए-करम है काफ़ी अगर उन्हें पेश-ओ-पस नहीं है

शकील बदायुनी

बदले बदले मिरे ग़म-ख़्वार नज़र आते हैं

शकील बदायुनी

ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बे-कार की बातें करते हैं

शकील बदायुनी

अभी जज़्बा-ए-शौक़ कामिल नहीं है

शकील बदायुनी

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे

शकील बदायुनी

अब तक शिकायतें हैं दिल-ए-बद-नसीब से

शकील बदायुनी

आँखों से दूर सुब्ह के तारे चले गए

शकील बदायुनी

आँख उन को देखती है नज़ारा किए बग़ैर

शकील बदायुनी

आख़िरी वक़्त है आख़िरी साँस है ज़िंदगी की है शाम आख़िरी आख़िरी

शकील बदायुनी

आदाब-ए-आशिक़ी से बेगाना कह रही है

शकील बदायुनी

ज़रा से ग़म के लिए जान से गुज़र जाना

शकील आज़मी

राज़ में रख तिरी रुस्वाई का क़िस्सा मैं हूँ

शकील आज़मी

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