शोक Poetry (page 36)

तिरी यादों से दिल फ़रोज़ाँ करेंगे

शकील बदायुनी

तिरी महफ़िल से उठ कर इश्क़ के मारों पे क्या गुज़री

शकील बदायुनी

तिरे बग़ैर अजब बज़्म-ए-दिल का आलम है

शकील बदायुनी

तौफ़-ए-हरम न देर की गहराइयों में है

शकील बदायुनी

तम्हीद-ए-सितम और है तकमील-ए-जफ़ा और

शकील बदायुनी

तकमील-ए-शबाब चाहता हूँ

शकील बदायुनी

सुब्ह का अफ़्साना कह कर शाम से

शकील बदायुनी

शोख़ नज़रों में जो शामिल बरहमी हो जाएगी

शकील बदायुनी

शब की बहार सुब्ह की नुदरत न पूछिए

शकील बदायुनी

रह वफ़ा में कोई साहिब-ए-जुनूँ न मिला

शकील बदायुनी

पैहम तलाश-ए-दोस्त मैं करता चला गया

शकील बदायुनी

पहलू में दर्द-ए-इश्क़ की दुनिया लिए हुए

शकील बदायुनी

नुमायाँ दोनों जानिब शान-ए-फ़ितरत होती जाती है

शकील बदायुनी

निगाह-ए-नाज़ का इक वार कर के छोड़ दिया

शकील बदायुनी

नज़र-नवाज़ नज़ारों में जी नहीं लगता

शकील बदायुनी

नज़र से क़ैद-ए-तअय्युन उठाई जाती है

शकील बदायुनी

नग़्मा-ए-इश्क़ सुनाता हूँ मैं इस शान के साथ

शकील बदायुनी

न सोचा था ये दिल लगाने से पहले

शकील बदायुनी

न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी है ज़ालिम तिरे ग़म से आश्कारा

शकील बदायुनी

मेरी बर्बादी को चश्म-ए-मो'तबर से देखिए

शकील बदायुनी

लुत्फ़-ए-निगाह-ए-नाज़ की तोहमत उठाए कौन

शकील बदायुनी

लतीफ़ पर्दों से थे नुमायाँ मकीं के जल्वे मकाँ से पहले

शकील बदायुनी

लम्हा लम्हा बार है तेरे बग़ैर

शकील बदायुनी

ला रहा है मय कोई शीशे में भर के सामने

शकील बदायुनी

कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ' नहीं है

शकील बदायुनी

कहीं हुस्न का तक़ाज़ा कहीं वक़्त के इशारे

शकील बदायुनी

कब तक 'शकील' दिल को दुआ कीजिएगा आप

शकील बदायुनी

जज़्बात की रौ में बह गया हूँ

शकील बदायुनी

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