हाथ Poetry (page 78)

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला

अहमद फ़राज़

चल निकलती हैं ग़म-ए-यार से बातें क्या क्या

अहमद फ़राज़

बाज़ार की फ़सील भी रुख़्सार पर मले

अहमद अज़ीमाबादी

सड़क के पार चला जा रहा है बचता हुआ

अहमद अज़ीम

किसे ख़बर कि है क्या क्या ये जान थामे हुए

अहमद अज़ीम

पहले हम अश्क थे फिर दीदा-ए-नम-नाक हुए

अहमद अता

वो हस्ब-ए-वादा न आया तो आँख भर आई

अहमद अली बर्क़ी आज़मी

तख़्ता-ए-मश्क़-ए-सितम मुझ को बनाने वाला

अहमद अली बर्क़ी आज़मी

बहार आई है फिर चमन में नसीम इठला के चल रही है

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

ये खुले खुले से गेसू इन्हें लाख तू सँवारे

आग़ा हश्र काश्मीरी

सब कुछ ख़ुदा से माँग लिया तुझ को माँग कर

आग़ा हश्र काश्मीरी

सू-ए-मय-कदा न जाते तो कुछ और बात होती

आग़ा हश्र काश्मीरी

चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की

आग़ा हश्र काश्मीरी

उड़ कर सुराग़-ए-कूचा-ए-दिलबर लगाइए

आग़ा हज्जू शरफ़

तिरछी नज़र न हो तरफ़-ए-दिल तो क्या करूँ

आग़ा हज्जू शरफ़

तिरी हवस में जो दिल से पूछा निकल के घर से किधर को चलिए

आग़ा हज्जू शरफ़

तलाश-ए-क़ब्र में यूँ घर से हम निकल के चले

आग़ा हज्जू शरफ़

हुए ऐसे ब-दिल तिरे शेफ़्ता हम दिल-ओ-जाँ को हमेशा निसार किया

आग़ा हज्जू शरफ़

हुआ है तौर-ए-बर्बादी जो बे-दस्तूर पहलू में

आग़ा हज्जू शरफ़

रह-ए-सुलूक में बल डालने पे रहता है

अफ़ज़ाल नवेद

जंग से जंगल बना जंगल से मैं निकला नहीं

अफ़ज़ाल नवेद

एक उजली उमंग उड़ाई थी

अफ़ज़ाल नवेद

धनक में सर थे तिरी शाल के चुराए हुए

अफ़ज़ाल नवेद

गुम-सुम हवा के पेड़ से लिपटा हुआ हूँ में

अफ़ज़ल मिनहास

गहरा सुकूत ज़ेहन को बेहाल कर गया

अफ़ज़ल मिनहास

दवा-ए-दर्द-ए-ग़म-ओ-इज़्तिराब क्या देता

अफ़ज़ल इलाहाबादी

शाइरी मैं ने ईजाद की

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

मैं डरता हूँ

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

क्या आग सब से अच्छी ख़रीदार है

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

जंगल के पास एक औरत

अफ़ज़ाल अहमद सय्यद

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