प्रेरित Poetry (page 2)

मिरी वफ़ाओं का नश्शा उतारने वाला

वसीम बरेलवी

खेल मौजों का ख़तरनाक सही क्या मैं इस खेल से डर जाऊँगा

वाक़िफ़ राय बरेलवी

ख़ता क़ुबूल नहीं है तो ख़ुद ख़ता कर देख

वक़ार ख़ान

ग़म-ए-मोहब्बत है कार-फ़रमा दुआ से पहले असर से पहले

वक़ार बिजनोरी

सहराओं में भी कोई हमराज़ गुलों का है

वाजिद सहरी

तू है और ऐश है और अंजुमन-आराई है

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

हुजूम-ए-ग़म से मिली है हयात-ए-नौ मुझ को

वाहिद प्रेमी

लम्हा लम्हा शोर सा बरपा हुआ अच्छा लगा

विशाल खुल्लर

बहुत टूटा हूँ लेकिन हौसला ज़िंदा बहुत कुछ है

वली मदनी

मुमकिन नहीं है अपने को रुस्वा वफ़ा करे

वफ़ा बराही

वही अरमान जैसे जी जो मुश्किल से निकलते हैं

तिलोकचंद महरूम

कोई है बाम पर देखा तो जाए

तारिक़ मतीन

कुछ दूर तक तो इस की सदा ले गई मुझे

तारिक़ बट

बहाऊँगा न मैं आँसू न मुस्कराउँगा

तैमूर हसन

इसे मैं और ये मेरा असा ही तय करेगा

तहसीन फ़िराक़ी

अजब यक़ीन सा उस शख़्स के गुमान में था

ताबिश कमाल

मोहताज नहीं क़ाफ़िला आवाज़-ए-दरा का

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

वो जो मुब्तला है मोहब्बतों के अज़ाब में

सय्यद मुबारक शाह

मुस्कुराने से मुद्दआ' क्या है

सय्यद हामिद

यही नहीं कि मिरा दिल ही मेरे बस में न था

सुरूर बाराबंकवी

वो बे-रुख़ी कि तग़ाफ़ुल की इंतिहा कहिए

सुरूर बाराबंकवी

सफ़ेद घोड़े पर सवार अजनबी

सुलतान सुबहानी

तिलिस्म-ए-कार-ए-जहाँ का असर तमाम हुआ

सुल्तान अख़्तर

हम न सही

सुबोध लाल साक़ी

मैं यूँ तो ख़्वाब की ताबीर सोचता भी नहीं

सुबहान असद

वो नग़्मगी का ज़ाइक़ा उस की सदा में था

सोहन राही

अब कोई सिलसिला नहीं बाक़ी

सिया सचदेव

कोई शिकवा कोई गिला दे दे

सिरज़ अालम ज़ख़मी

कहाँ तलक कहूँ साक़ी कि ला शराब तो दे

ज़ौक़

सिमट सिमट सी गई थी ज़मीं किधर जाता

शाज़ तमकनत

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