चलो चलें Poetry (page 19)

जंगलों में बारिशें हैं दूर तक

शाहिदा तबस्सुम

हवाएँ चाँदनी में काँपती हैं

शाहिदा तबस्सुम

इक हुजूम-ए-गिर्या की हर नज़र तमाशाई

शाहिदा तबस्सुम

सितारा-चश्म है और मेहरबाँ है

शाहिदा हसन

सवाद-ए-शाम से ता-सुब्ह-ए-बे-किनार गई

शाहिदा हसन

चराग़-ए-शाम ही तन्हा नहीं है

शाहिदा हसन

सीने की मिसाल आग है चाँदी सा धुआँ है

शाहिद शैदाई

वो क्यूँ आया

शाहिद मलिक

हर दर-ओ-दीवार पे लर्ज़ां कोई पैकर लगे

शाहिद माहुली

शिकस्ता जिस्म दरीदा जबीन की जानिब

शाहिद कमाल

फिर आज दर्द से रौशन हुआ है सीना-ए-ख़्वाब

शाहिद कमाल

नन्हा सा दिया है कि तह-ए-आब है रौशन

शाहिद कमाल

कूज़ा-ए-दर्द में ख़ुशियों के समुंदर रख दे

शाहिद कमाल

कुंज-ए-दिल में है जो मलाल उछाल

शाहिद कमाल

कुछ यक़ीं सा गुमान सा कुछ है

शाहिद कमाल

जो इस ज़मीन पे रहते थे आसमान से लोग

शाहिद कमाल

धूप के ज़र्द जज़ीरों में नुमू ज़िंदा है

शाहिद कमाल

नुक़ूश-ए-रहगुज़र-ए-शौक़ सब मिटा देना

शाहिद इश्क़ी

नक़्द-ए-दिल-ओ-जाँ उस की ख़ातिर रहन-ए-जाम करो

शाहिद इश्क़ी

लाए तो नक़्द-ए-जाँ सर-ए-बाज़ार क्या कहें

शाहिद इश्क़ी

ए'तिराफ़

शाहिद अख़्तर

महका है गुल-ए-ख़ून-ए-वफ़ा जानिए क्या हो

शाहिद अख़्तर

जब अपना मुक़द्दर ठहरे हैं ज़ख़्मों के गुलिस्ताँ और सही

शाहिद अख़्तर

दम अजनबी सदाओं का भरते हो साहिबो

शाहिद अहमद शोएब

ये हम कौन हैं

शाहीन मुफ़्ती

ख़ाक-ए-दिल कहकशाँ से मिलती है

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दुनिया ने बस थका ही दिया काम कम हुए

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

दर-ए-इम्काँ से गुज़र कर सर-ए-मंज़र आ कर

शाहीन अब्बास

दयार-ए-शाम न बुर्ज-ए-सहर में रौशन हूँ

शहबाज़ नदीम ज़ियाई

मता-ए-जाँ हैं मिरी उम्र भर का हासिल हैं

शहबाज़ ख़्वाजा

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