चलो चलें Poetry (page 63)

शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिल की सदा हूँ

आलमताब तिश्ना

मिरी दस्तरस में है गर क़लम मुझे हुस्न-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दे

आलमताब तिश्ना

किस किस से दोस्ती हुई ये ध्यान में नहीं

आलमताब तिश्ना

हिसार-ए-मक़्तल-ए-जाँ में लहू लहू मैं था

आलमताब तिश्ना

असीर-ए-दश्त-ए-बला का न माजरा कहना

आलमताब तिश्ना

अब भी ज़र्रों पे सितारों का गुमाँ है कि नहीं

आलमताब तिश्ना

उर्दू

आलम मुज़फ्फ़र नगरी

बदन मल्बूस में शोला सा इक लर्ज़ां क़रीन-ए-जाँ

अकरम नक़्क़ाश

क़रार-ए-गुम-शुदा मेरे ख़ुदा कब आएगा

अकरम नक़्क़ाश

कुछ फ़ासला नहीं है अदू और शिकस्त में

अकरम नक़्क़ाश

खुली और बंद आँखों से उसे तकता रहा मैं भी

अकरम नक़्क़ाश

दश्त को ढूँडने निकलूँ तो जज़ीरा निकले

अकरम नक़्क़ाश

यूँ ही रक्खोगे इम्तिहाँ में क्या

अकरम महमूद

सितारा आँख में दिल में गुलाब क्या रखना

अकरम महमूद

अब दिल भी दुखाओ तो अज़िय्यत नहीं होती

अकरम महमूद

मताअ-ए-राएगाँ

अख़्तर-उल-ईमान

एक लड़का

अख़्तर-उल-ईमान

आख़िरी मुलाक़ात

अख़्तर-उल-ईमान

मिला जो कोई यहाँ रम्ज़-आशना न मुझे

अख़्तर ज़ियाई

नए सुर की तमसील

अख़्तर उस्मान

ज़रा सी देर थी बस इक दिया जलाना था

अख्तर शुमार

हिसार-ए-क़र्या-ए-खूँबार से निकलते हुए

अख्तर शुमार

एक हुस्न-फ़रोश से

अख़्तर शीरानी

बदनाम हो रहा हूँ

अख़्तर शीरानी

मैं आरज़ू-ए-जाँ लिखूँ या जान-ए-आरज़ू!

अख़्तर शीरानी

जो ज़ेहन-ओ-दिल के ज़हरीले बहुत हैं

अख़तर शाहजहाँपुरी

इक अजब आलम है दिल का ज़िंदगी की राह में

अख्तर सईदी

दुश्मन-ए-जाँ ही सही साथ तो इक उम्र का है

अख़्तर सईद ख़ान

दिल-ए-शोरीदा की वहशत नहीं देखी जाती

अख़्तर सईद ख़ान

जुनूँ भी ज़हमत ख़िरद भी ल'अनत है ज़ख़्म-ए-दिल की दवा मोहब्बत

अख़्तर ओरेनवी

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