चलो चलें Poetry (page 64)

दारू-ए-होश-रुबा नर्गिस-ए-बीमार तो हो

अख़्तर ओरेनवी

मैं ग़ैर-महफ़ूज़ रात से डरता हूँ

अख़्तर हुसैन जाफ़री

तपिश गुलज़ार तक पहुँची लहू दीवार तक आया

अख़्तर हुसैन जाफ़री

वो ज़िंदगी है उस को ख़फ़ा क्या करे कोई

अख़्तर होशियारपुरी

वो रतजगा था कि अफ़्सून-ए-ख़्वाब तारी था

अख़्तर होशियारपुरी

वो जो दीवार-ए-आश्नाई थी

अख़्तर होशियारपुरी

तिलिस्म-ए-गुम्बद-ए-बे-दर किसी पे वा न हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

था एक साया सा पीछे पीछे जो मुड़ के देखा तो कुछ नहीं था

अख़्तर होशियारपुरी

क़र्या-ए-जाँ से गुज़र कर हम ने ये देखा भी है

अख़्तर होशियारपुरी

किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था

अख़्तर होशियारपुरी

दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो

अख़्तर होशियारपुरी

बजा कि दुश्मन-ए-जाँ शहर-ए-जाँ के बाहर है

अख़्तर होशियारपुरी

अपने क़दमों ही की आवाज़ से चौंका होता

अख़्तर होशियारपुरी

शबाब नाम है उस जाँ-नवाज़ लम्हे का

अख़्तर अंसारी

ऐ सोज़-ए-जाँ-गुदाज़ अभी मैं जवान हूँ

अख़्तर अंसारी

ख़िज़ाँ में आग लगाओ बहार के दिन हैं

अख़्तर अंसारी

ग़म-ए-हयात कहानी है क़िस्सा-ख़्वाँ हूँ मैं

अख़्तर अंसारी

आईना-ए-निगाह में अक्स-ए-शबाब है

अख़्तर अंसारी

फ़लक से चाँद चमन से गुलाब ले आए

अख़लाक़ बन्दवी

अकेले अकेले ही पा ली रिहाई

अख़लाक़ अहमद आहन

वारिस

अकबर हैदराबादी

हिसार-अंदर-हिसार

अकबर हैदराबादी

हर्फ़-ए-यक़ीं

अकबर हैदराबादी

अजल सराए तीरगी

अकबर हैदराबादी

बदन से रिश्ता-ए-जाँ मो'तबर न था मेरा

अकबर हैदराबादी

आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है

अकबर हैदराबादी

रात आई है बच्चों को पढ़ाने में लगा हूँ

अकबर हमीदी

बर्क़-ए-कलीसा

अकबर इलाहाबादी

जो तुम्हारे लब-ए-जाँ-बख़्श का शैदा होगा

अकबर इलाहाबादी

ये शौक़ सारे यक़ीन-ओ-गुमाँ से पहले था

अकबर अली खान अर्शी जादह

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