चलो चलें Poetry (page 62)

ला-मकाँ लग आशिक़ाँ के इश्क़ का पर्वाज़ है

अलीमुल्लाह

ख़यालात रंगीं नहीं बोलते उस को ज्यूँ बास फूलों के रंगों में रहिए

अलीमुल्लाह

सितारों के पयाम आए बहारों के सलाम आए

अली सरदार जाफ़री

नग़्मा-ए-ज़ंजीर है और शहर-ए-याराँ इन दिनों

अली सरदार जाफ़री

मैं जहाँ तुम को बुलाता हूँ वहाँ तक आओ

अली सरदार जाफ़री

कभी ख़ंदाँ कभी गिर्यां कभी रक़सा चलिए

अली सरदार जाफ़री

हम जो महफ़िल में तिरी सीना-फ़िगार आते हैं

अली सरदार जाफ़री

अक़ीदे बुझ रहे हैं शम-ए-जाँ गुल होती जाती है

अली सरदार जाफ़री

अक़ीदे बुझ रहे हैं शम-ए-जाँ ग़ुल होती जाती है

अली सरदार जाफ़री

अब आ गया है जहाँ में तो मुस्कुराता जा

अली सरदार जाफ़री

हर बुरे वक़्त के अफ़आ'ल बदल देता है

अली मुज़म्मिल

सत्तर माओं का प्यार

अली मोहम्मद फ़र्शी

होली

अली जव्वाद ज़ैदी

नींद आ गई थी मंज़िल-ए-इरफ़ाँ से गुज़र के

अली जव्वाद ज़ैदी

शाम घर जाएगी मैं किधर जाऊँगा

अली इमरान

दिल में चलती हुई जंगों से निकल आऊँगा

अली इमरान

चमन में वो फ़रामोशी का मौसम था मैं ख़ुद को भी

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

चटक में ग़ुंचे की वो सौत-ए-जाँ-फ़ज़ा तो नहीं

अली अख़्तर अख़्तर

हरीम-ए-काबा बना दी वो सर-ज़मीं मैं ने

अली अख़्तर अख़्तर

हरीम-ए-का'बा बना दी वो सर-ज़मीं मैं ने

अली अख़्तर अख़्तर

सफ़ीर-ए-लैला-2

अली अकबर नातिक़

ज़र्द फूलों में बसा ख़्वाब में रहने वाला

अली अकबर नातिक़

बाद-ए-सहरा को रह-ए-शहर पे डाला किस ने

अली अकबर नातिक़

किसी पे बार-ए-दिगर भी निगाह कर न सके

अली अकबर अब्बास

जो ख़ुद को पाएँ तो फिर दूसरा तलाश करें

अली अकबर अब्बास

मुझे तो इंतिज़ार-ए-इश्क़ में ही लुत्फ़ आता है

अलीना इतरत

मौसम-ए-गुल पर ख़िज़ाँ का ज़ोर चल जाता है क्यूँ

अलीना इतरत

न पूछ रब्त है क्या उस की दास्ताँ से मुझे

अलीम अफ़सर

चले थे भर के रेत जब सफ़र की जिस्म-ओ-जाँ में हम

अलीम अफ़सर

वो कि हर अहद-ए-मोहब्बत से मुकरता जाए

आलमताब तिश्ना

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