विचार Poetry (page 13)

मुझ को साक़ी ने जो रुख़्सत किया मय-ख़ाने से

शकील बदायुनी

मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं

शकील बदायुनी

बहार आई किसी का सामना करने का वक़्त आया

शकील बदायुनी

आँख उन को देखती है नज़ारा किए बग़ैर

शकील बदायुनी

ज़रा से ग़म के लिए जान से गुज़र जाना

शकील आज़मी

तवील हिज्र है इक मुख़्तसर विसाल के बा'द

शकील आज़मी

क़दम उठे हैं तो धूल आसमान तक जाए

शकील आज़मी

कहीं से चाँद कहीं से क़ुतुब-नुमा निकला

शकील आज़मी

अकेले रहने की ख़ुद ही सज़ा क़ुबूल की है

शकील आज़मी

शफ़क़ जो रू-ए-सहर पर गुलाल मलने लगी

शकेब जलाली

समझ सको तो ये तिश्ना-लबी समुंदर है

शकेब जलाली

मौज-ए-सबा रवाँ हुई रक़्स-ए-जुनूँ भी चाहिए

शकेब जलाली

इस बुत-कदे में तू जो हसीं-तर लगा मुझे

शकेब जलाली

आया है हर चढ़ाई के बा'द इक उतार भी

शकेब जलाली

समझ में आती है बादल की आह-ओ-ज़ारी अब

शाइस्ता यूसुफ़

जुनून-ए-इश्क़ की आमादगी ने कुछ न दिया

शाइस्ता सहर

तिरी जो ज़ुल्फ़ का आया ख़याल आँखों में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मुद्दत से ख़्वाब में भी नहीं नींद का ख़याल

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तू जो कहता है बोलता क्या है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरी जो ज़ुल्फ़ का आया ख़याल आँखों में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

तिरी भुवाँ की तेग़ जब आई नज़र मुझे

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जिस कूँ पी का ख़याल होता है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ नहीं कोई नहंग है यारो

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

गुल की और बुलबुल की सोहबत को चमन का शाना है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दुनिया ख़याल-ओ-ख़्वाब है मेरी निगाह में

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चमन में दहर के हर गुल है कान की सूरत

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

मिरे रोग का न मलाल कर मिरे चारा-गर

शहज़ाद नय्यर

मिरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख़याल करे

शहज़ाद नय्यर

जुलते हैं इक चराग़ की लौ से कई चराग़

शहज़ाद अहमद

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