भगवान Poetry (page 59)

सुब्ह और शाम के सब रंग हटाए हुए हैं

अज़ीज़ नबील

हुस्न-ए-आरास्ता क़ुदरत का अतिय्या है मगर

अज़ीज़ लखनवी

अहद में तेरे ज़ुल्म क्या न हुआ

अज़ीज़ लखनवी

लज़्ज़त-ए-ग़म

अज़ीज़ लखनवी

आतिश-ए-ख़ामोश

अज़ीज़ लखनवी

तिरी कोशिश हम ऐ दिल सई-ए-ला-हासिल समझते हैं

अज़ीज़ लखनवी

जो यहाँ महव-ए-मा-सिवा न हुआ

अज़ीज़ लखनवी

इस वहम की इंतिहा नहीं है

अज़ीज़ लखनवी

दिल हमारा है कि हम माइल-ए-फ़रियाद नहीं

अज़ीज़ लखनवी

ऐ दिल ये है ख़िलाफ़-ए-रस्म-ए-वफ़ा-परस्ती

अज़ीज़ लखनवी

हुस्न है दाद-ए-ख़ुदा इश्क़ है इमदाद-ए-ख़ुदा

अज़ीज़ हैदराबादी

न बदलना था न बदला दिल-ए-शैदा अपना

अज़ीज़ हैदराबादी

माना कि ज़िंदगी में है ज़िद का भी एक मक़ाम

अज़ीज़ हामिद मदनी

लिखी हुई जो तबाही है उस से क्या जाता

अज़ीज़ हामिद मदनी

इस गुफ़्तुगू से यूँ तो कोई मुद्दआ नहीं

अज़ीज़ हामिद मदनी

ग़लत-बयाँ ये फ़ज़ा महर ओ कीं दरोग़ दरोग़

अज़ीज़ हामिद मदनी

ज़ौक़-ए-अमल के सामने दूरी सिमट गई

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

सुकून-ए-दिल गया नज़रों से सब क़तारे गए

अज़ीम हैदर सय्यद

वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना

अज़हर इनायती

अज़िय्यत उस की ज़ेहनी दूर कर दे

अज़हर इनायती

वफ़ा ख़ुलूस का सिंगार रोज़ करती है

अज़हर हाश्मी

तस्बीह-ए-कुमरी सर्व-ए-सनोबर समेट लो

अज़हर हाश्मी

शहर को आतिश-ए-रंजिश के धुआँ तक देखूँ

अज़हर हाश्मी

जो दौलत तरक़्क़ी-रसाई बहुत है

अज़हर हाश्मी

आज़ुर्दा निगाहों पे ये मंज़र नहीं उतरा

अज़हर हाश्मी

ऐसी ग़ुर्बत को ख़ुदा ग़ारत करे

अज़हर फ़राग़

मैं सोचता हूँ सबक़ मैं ने वो पढ़ा ही नहीं

अज़ीज़ परीहारी

वो रूह के गुम्बद में सदा बन के मिलेगा

आज़ाद गुलाटी

कभी मिली जो तिरे दर्द की नवा मुझ को

आज़ाद गुलाटी

एक हंगामा बपा है मुझ में

आज़ाद गुलाटी

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