भगवान Poetry (page 69)

मक़ाम-ए-दिल बहुत ऊँचा बना है

अख़्तर ओरेनवी

कहाँ जाएँ छोड़ के हम उसे कोई और उस के सिवा भी है

अख़तर मुस्लिमी

किसी का चेहरा किसी पर सजा नहीं देता

अख्तर लख़नवी

दिल में इक जज़्बा-ए-बेदाद-ओ-जफ़ा ही होगा

अख़्तर होशियारपुरी

ज़बान बंद रही दिल का मुद्दआ' न कहा

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

न राज़-ए-इब्तिदा समझो न राज़-ए-इंतिहा समझो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

सीना ख़ूँ से भरा हुआ मेरा

अख़्तर अंसारी

कोई मआल-ए-मोहब्बत मुझे बताओ नहीं

अख़्तर अंसारी

ख़्वाहिश-ए-ऐश नहीं दर्द-ए-निहानी की क़सम

अख़्तर अंसारी

मक़्तल

अख़लाक़ अहमद आहन

जला के दिल को रखा सुब्ह-ओ-शाम रोज़-ओ-शब

अख़लाक़ अहमद आहन

अकेले अकेले ही पा ली रिहाई

अख़लाक़ अहमद आहन

मुलाहिज़ा हो मिरी भी उड़ान पिंजरे में

अखिलेश तिवारी

वो हज़ार हम पे जफ़ा सही कोई शिकवा फिर भी रवा नहीं

अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी

ख़ुद-परस्ती ख़ुदा न बन जाए

अकबर हैदराबादी

सितम-ज़दा कई बशर क़दम क़दम पे थे

अकबर हैदराबादी

नाम 'अकबर' तो मिरा माँ की दुआ ने रक्खा

अकबर हमीदी

काफ़िर था मैं ख़ुदा का न मुंकिर दुआ का था

अकबर हमीदी

सिधारें शैख़ काबा को हम इंग्लिस्तान देखेंगे

अकबर इलाहाबादी

सब हो चुके हैं उस बुत-ए-काफ़िर-अदा के साथ

अकबर इलाहाबादी

रक़ीबों ने रपट लिखवाई है जा जा के थाने में

अकबर इलाहाबादी

रहता है इबादत में हमें मौत का खटका

अकबर इलाहाबादी

हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से

अकबर इलाहाबादी

फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं

अकबर इलाहाबादी

बुतों के पहले बंदे थे मिसों के अब हुए ख़ादिम

अकबर इलाहाबादी

अक़्ल में जो घिर गया ला-इंतिहा क्यूँकर हुआ

अकबर इलाहाबादी

अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा

अकबर इलाहाबादी

मदरसा अलीगढ़

अकबर इलाहाबादी

ये सुस्त है तो फिर क्या वो तेज़ है तो फिर क्या

अकबर इलाहाबादी

साँस लेते हुए भी डरता हूँ

अकबर इलाहाबादी

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