आपका Poetry (page 32)

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

इश्क़ हर-चंद मिरी जान सदा खाता है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ज़र्रे ज़र्रे में महक प्यार की डाली जाए

दानिश अलीगढ़ी

वादा झूटा कर लिया चलिए तसल्ली हो गई

दाग़ देहलवी

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

दाग़ देहलवी

इस क़दर नाज़ है क्यूँ आप को यकताई का

दाग़ देहलवी

इस नहीं का कोई इलाज नहीं

दाग़ देहलवी

ग़म से कहीं नजात मिले चैन पाएँ हम

दाग़ देहलवी

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

दाग़ देहलवी

हुस्न के जल्वे लुटाए तिरी रा'नाई ने

चरख़ चिन्योटी

सुलगती रेत में इक चेहरा आब सा चमका

बृजेश अम्बर

हर-दिल-अज़ीज़ वो भी है हम भी हैं ख़ुश-मिज़ाज

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

अपनी तो कोई बात बनाए नहीं बनी

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

धुँद

बिलाल अहमद

क़ुर्बतें नहीं रक्खीं फ़ासला नहीं रक्खा

भारत भूषण पन्त

हज़रत-ए-दिल ये इश्क़ है दर्द से कसमसाए क्यूँ

बेख़ुद देहलवी

शिकवा सुन कर जो मिज़ाज-ए-बुत-ए-बद-ख़ू बदला

बेखुद बदायुनी

मसरूर भी हूँ ख़ुश भी हूँ लेकिन ख़ुशी नहीं

बहज़ाद लखनवी

हम मय-कदे से मर के भी बाहर न जाएँगे

बेदम शाह वारसी

जादू थी सेहर थी बला थी

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

वो अपने मतलब की कह रहे हैं ज़बान पर गो है बात मेरी

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

पूछते हैं वो इश्क़ का मतलब

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

कौन कहता है नसीम-ए-सहरी आती है

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

जब मिलेंगे कि अब मिलेंगे आप

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

भूला-बिसरा ख़्वाब हुए हम

बशीर सैफ़ी

सब की मौजूदगी समझता है

बशीर महताब

इक लम्हा भी गुज़ारूँ भला क्यूँ किसी के साथ

बशीर महताब

मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो

बशीर बद्र

ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में

बशीर बद्र

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