लहू Poetry (page 29)

किन आवाज़ों का सन्नाटा मुझ में है

अय्यूब ख़ावर

हवस ने मुझ से पूछा था तुम्हारा क्या इरादा है

औरंगज़ेब

जब भी तन्हाई के एहसास से घबराता हूँ

अतीक़ुल्लाह

वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी

आतिफ़ ख़ान

दुनिया से हुए बैठे हो रू-पोश ऐ जाना

आतिफ़ ख़ान

मोहब्बतें भी लिखी हुई हैं अदावतें भी लिखी हुई हैं

अतहर सलीमी

धुएँ में डूबे हैं फूल तारे चराग़ जुगनू चिनार कैसे

अतहर सलीमी

मुसव्विर का हाथ

अतहर राज़

यही जो तेरे मिरे दिल की राजधानी थी

अतहर नासिक

वो इश्क़ जो हम से रूठ गया अब उस का हाल बताएँ क्या

अतहर नफ़ीस

साया मेरा साया वो

अतहर नफ़ीस

सिसकते फूलों का कोई भी दर्द-मंद नहीं

अतहर अज़ीज़

भरोसे का क़त्ल

अतीया दाऊद

किसी ने भेजा है ख़त प्यार और वफ़ा लिख कर

अतीक़ अंज़र

दिल के आँगन में तिरी याद का तारा चमका

अतीक़ अंज़र

वो दश्त-ए-कर्ब-ओ-बला में उतरने देता नहीं

अताउल हक़ क़ासमी

इश्क़ तो अपने लहू में ही सँवरता है सो हम

अता तुराब

आसमानों में भी दरवाज़ा लगा कर देखें

अता तुराब

सरमाया-दारी

असरार-उल-हक़ मजाज़

नौ-जवान से

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़ाना-ब-दोश

असरार-उल-हक़ मजाज़

बर्बाद-ए-तमन्ना पे इताब और ज़ियादा

असरार-उल-हक़ मजाज़

आसमाँ तक जो नाला पहुँचा है

असरार-उल-हक़ मजाज़

कैसे रफ़ू हों चाक-ए-गरेबाँ मैं भी सोचूँ तू भी सोच

असरारुल हक़ असरार

शैतान का फ़रमान

असरार जामई

पहचान ज़िंदगी की समझ कर मैं चुप रहा

असरार अकबराबादी

देख के अर्ज़ां लहू सुर्ख़ी-ए-मंज़र ख़मोश

असलम महमूद

ज़लज़ले का ख़ौफ़ तारी है दर-ओ-दीवार पर

असलम कोलसरी

हर-चंद बे-नवा है कोरे घड़े का पानी

असलम कोलसरी

किसी की याद का साया था या कि झोंका था

असलम हबीब

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